
मोदी सरकार का बड़ा फैसला: जाति जनगणना को मिली मंजूरी, गन्ना किसानों को राहत और पूर्वोत्तर में हाई-स्पीड कॉरिडोर की हरी झंडी
नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में कई अहम और दूरगामी फैसले लिए गए। इनमें सबसे बड़ा फैसला जातिगत जनगणना को लेकर आया है, जिसे लंबे समय से विपक्ष एक मुख्य मुद्दा बनाकर उठा रहा था। अब केंद्र सरकार ने ऐलान किया है कि जातियों की गिनती अब सर्वे के रूप में नहीं, बल्कि मूल जनगणना का हिस्सा बनकर की जाएगी। इसके साथ ही गन्ना किसानों को राहत देने वाला निर्णय और मेघालय-असम के बीच एक नए हाई-स्पीड कॉरिडोर के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है।
जाति जनगणना पर केंद्र का बड़ा फैसला
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को प्रेस वार्ता में बताया कि भारत में 1947 के बाद से कोई जातिगत जनगणना नहीं हुई है। अब मोदी सरकार ने इसे लेकर ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया है कि अगली जनगणना में जातीय विवरण भी एकत्र किया जाएगा। उन्होंने कहा, “जाति आधारित गणना अब सर्वे के जरिए नहीं, बल्कि आधिकारिक जनगणना प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी। यह फैसला इसलिए जरूरी था क्योंकि कई राज्य सरकारों ने जाति आधारित सर्वेक्षण कर समाज में भ्रम और राजनीतिक असंतुलन फैलाया है।”
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि “कांग्रेस ने जाति जनगणना को सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया और कभी इसे गंभीरता से लागू नहीं किया।” उन्होंने कहा कि यह विषय संविधान की केंद्रीय सूची में आता है और इसलिए इसका अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
सियासी समीकरणों में बड़ा उलटफेर
जाति जनगणना की मांग विपक्ष, खासकर राहुल गांधी और कांग्रेस का प्रमुख चुनावी मुद्दा रहा है। राहुल गांधी लगातार कहते रहे हैं कि यदि उनकी सरकार बनी, तो जातिगत जनगणना करवाई जाएगी और आरक्षण की 50 फीसदी सीमा को तोड़कर पिछड़े वर्गों को उनका अधिकार दिया जाएगा। अब बीजेपी द्वारा इस घोषणा के साथ विपक्ष से यह मुद्दा छिनता नजर आ रहा है। खासकर बिहार जैसे राज्य, जहां जातीय राजनीति की गहरी जड़ें हैं, वहां इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला एनडीए को पिछड़े वर्गों, विशेषकर OBC और EBC समुदायों में नई बढ़त दिला सकता है। राज्य की लगभग 63% आबादी इसी वर्ग से आती है। इससे जहां बीजेपी और JDU के रिश्ते और प्रगाढ़ हो सकते हैं, वहीं RJD और कांग्रेस को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ेगा।
जाति जनगणना क्यों है अहम?
- इससे यह पता चलेगा कि किस जाति की जनसंख्या कितनी है।
- आरक्षण की समीक्षा और विस्तार के लिए ठोस आंकड़े उपलब्ध होंगे।
- अभी तक कई जातियां ऐसी हैं जिन्हें उनका उचित सामाजिक लाभ नहीं मिल पाया है।
- सामाजिक न्याय की दिशा में एक नई बहस और नीति निर्माण की संभावनाएं बनेंगी।
गन्ना किसानों को राहत: बढ़ी एफआरपी दर
कैबिनेट ने गन्ना किसानों के लिए एक और राहत भरा फैसला लिया है। 2025-26 चीनी सत्र के लिए गन्ने की एफआरपी (उचित और लाभकारी मूल्य) दर 355 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है। यह दर 10.25% बेसिक रिकवरी पर आधारित होगी। इसके अलावा, रिकवरी दर में हर 0.1% की बढ़ोतरी पर 3.46 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त मिलेंगे, जबकि उतनी ही गिरावट पर कटौती की जाएगी।
यह निर्णय न केवल किसानों की आय सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह चीनी मिलों और किसानों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
मेघालय-असम के बीच हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर
कैबिनेट ने पूर्वोत्तर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने की दिशा में भी एक बड़ा निर्णय लिया है। मेघालय के शिलांग से असम के सिलचर तक एक नया ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह 166.80 किलोमीटर लंबा होगा और राष्ट्रीय राजमार्ग-6 (NH-6) के तहत हाइब्रिड एन्यूटी मोड में तैयार किया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 22,864 करोड़ रुपये आंकी गई है।
इस कॉरिडोर से पूर्वोत्तर में आवागमन आसान होगा, आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी और सीमा क्षेत्रों में रणनीतिक रूप से भी भारत की पहुंच मजबूत होगी।
निष्कर्ष:
मोदी सरकार के इन फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र न केवल सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बढ़ा रही है, बल्कि किसानों और पूर्वोत्तर के विकास को भी प्राथमिकता दे रही है। जातिगत जनगणना का निर्णय न केवल राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करेगा, बल्कि देश के सामाजिक ढांचे में नई हलचल पैदा कर सकता है।
आगामी चुनावों में इसका असर कितना पड़ेगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन फिलहाल मोदी सरकार ने विपक्ष के सबसे मजबूत मुद्दे को अपने पाले में कर एक बड़ा सियासी दांव जरूर चल दिया है।
NGV PRAKASH NEWS

