प्रेम की ‘पोर्टिंग सेवा’! पहले पति से लव मैरिज, फिर प्रेमी संग विदाई – गांव में बना ‘प्रेम समझौता पत्र'”



“दरभंगा में प्रेम की ‘पोर्टिंग सेवा’! पहले पति से लव मैरिज, फिर प्रेमी संग विदाई – गांव में बना ‘प्रेम समझौता पत्र'”


सिंहवाड़ा (दरभंगा), NGV PRAKASH NEWS।
प्रेम का कोई नेटवर्क स्थायी नहीं होता – ये बात अब दरभंगा के सिंहवाड़ा इलाके में साबित हो चुकी है। यहां प्रेम न सिम कार्ड से कम निकला, जो पहले एक पति के नाम से एक्टिव था और फिर अचानक नए नेटवर्क यानी प्रेमी पर पोर्ट हो गया!

दरअसल, सिमरी थाना क्षेत्र की एक महिला, जिसने पहले राजू कुमार चौरसिया से लव मैरिज की थी, अब खुलेआम बुलेट नामक युवक से मोहब्बत का इज़हार कर बैठी। पति, घरवाले, और यहां तक कि गांव के मुखिया तक समझा-समझा कर थक गए, लेकिन मोहब्बत में ‘नंबर ब्लॉक’ नहीं हुआ।

राजू की प्रेम कहानी बनी ड्रामा सीरियल:
2021 में मुजफ्फरपुर के गायघाट में एक शादी समारोह में राजू को खुशबू से मोहब्बत हो गई। दोनों ने परिवार के खिलाफ जाकर शादी कर ली। एक प्यारे बेटे दीपांशु का जन्म भी हुआ। सबकुछ ठीक चल रहा था… पर फिल्म की तरह अचानक ट्विस्ट आया।

दिल्ली में बुलेट की एंट्री:
राजू जब खुशबू को दिल्ली मजदूरी पर साथ ले गया, तो वहीं पड़ोस में रहने वाले बुलेट से उसकी नज़दीकियां बढ़ गईं। जब पति को शक हुआ, तो पत्नी को गांव ले आया। लेकिन मोहब्बत का GPS बुलेट को भी गांव खींच लाया।

रात में रंगे हाथ पकड़ा गया प्रेमी:
एक रात प्रेमी चुपके से खुशबू के कमरे में जा घुसा, लेकिन घरवालों ने रंगे हाथ पकड़ लिया। गांव में हंगामा मच गया, प्रेमी की जमकर कुटाई हुई। पुलिस तक मामला पहुंचा, और पंचायत बुलानी पड़ी।

‘प्रेम समझौता पत्र’ बना समाधान:
गांव के सरपंच, मुखिया और पंचों ने पूरा प्रेम-परामर्श चलाया, लेकिन खुशबू अड़ी रही — “अब चोरी-छिपे नहीं, खुलेआम प्रेम चाहिए।” राजू ने भी हार मान ली। दिल्ली से फोन पर बोला, “भेज दीजिए साहब, मेरा भी चैन मिलेगा।”

इसके बाद बुलेट के परिवार को बुलाया गया। पंचायत के बीच कानूनी सहमति पत्र बना, और महिला प्रेमी संग रवाना हो गई — पीछे छोड़ गई तीन साल का बेटा और एक प्रेम कहानी जिसे गांव वाले आज भी मोबाइल सिम की तरह “प्रेम पोर्टिंग” कहकर सुना रहे हैं।



👉कहानी चाहे जितनी अजीब हो, लेकिन इसमें समाज की बदलती सोच, प्रेम की स्वायत्तता और पारिवारिक तानों-बानों की उलझनें साफ झलकती हैं। अब दरभंगा में लोग कहते हैं – “प्रेम है… लेकिन इसकी वैलिडिटी कब तक है, कोई नहीं जानता!”


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