
Gyan Prakash Dubey
बस्ती 15 मई 25.
भयंकर गर्मी और लू की मार झेलते बच्चे: स्कूलों को बंद न करने पर उठ रहे सवाल | कौन लेगा जिम्मेदारी
भीषण गर्मी और लू की चपेट में आ चुके उत्तर भारत के अधिकांश इलाके इन दिनों मानव सहनशक्ति की परीक्षा ले रहे हैं। तेज धूप, तपता आसमान और 45 डिग्री के आसपास पहुंचा तापमान हर वर्ग को प्रभावित कर रहा है, मगर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं बच्चे – जिन्हें प्रशासन की बेरुखी और स्कूल प्रबंधन की संवेदनहीनता के कारण अब भी रोज़ स्कूल जाना पड़ रहा है।
भयंकर गर्मी और लू की मार झेलते बच्चे: स्कूलों को बंद न करने पर उठ रहे सवाल | कौन लेगा जिम्मेदारी?
रिपोर्ट: NGV PRAKASH NEWS
बच्चे बीमार, मगर स्कूल खुले हैं
पिछले दो दिनों से लू का असर चरम पर है। तापमान में अचानक उछाल के कारण छोटे बच्चों में बुखार, उल्टी-दस्त, और कमजोरी जैसी शिकायतें आम हो गई हैं। सरकारी अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में नन्हें मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों में हीट स्ट्रोक के लक्षण, डिहाइड्रेशन, और हाइपरपीरेक्सिया (अत्यधिक बुखार) की गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। कुछ मामलों में बच्चों को शरीर में ऐंठन और मानसिक भ्रम (confusion) की स्थिति तक पहुंचते देखा गया है – जो कि सीधे तौर पर हीट एक्सहॉशन और लू का परिणाम है।
स्कूल फीस का दबाव, बच्चों की सेहत से समझौता
चौंकाने वाली बात यह है कि जब ज़िला प्रशासन और राज्य सरकारों को स्कूलों को गर्मी की छुट्टी देने का निर्णय लेना चाहिए था, तब कई निजी स्कूल फीस वसूली और उपस्थिति के दबाव में बच्चों को अब भी स्कूल बुला रहे हैं।
कई अभिभावकों ने NGV PRAKASH NEWS को बताया कि स्कूलों में पंखों तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। न पीने का ठंडा पानी है, न मेडिकल सुविधा। ऐसी स्थिति में बच्चों को स्कूल भेजना किसी सजा से कम नहीं है।
प्रशासन की चुप्पी: एक अनकहा अपराध?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस मौसमी आपदा की स्थिति में भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस निर्देश या आदेश क्यों नहीं जारी किए गए? क्या किसी हादसे का इंतज़ार किया जा रहा है? यदि किसी मासूम की जान चली जाती है, तो आखिर उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा – स्कूल प्रशासन या शिक्षा विभाग?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब मौसम विभाग पहले ही हीटवेव की चेतावनी जारी कर चुका है, तब सरकार और प्रशासन को स्कूलों को तत्काल बंद करने या गर्मी की छुट्टी घोषित करने का निर्णय लेना चाहिए।
क्या कहती हैं गाइडलाइंस?
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और यूनिसेफ जैसी संस्थाएं पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि 40 डिग्री से अधिक तापमान होने पर स्कूलों को सुबह के समय तक सीमित रखना चाहिए या फिर बंद कर देना चाहिए। परंतु दुर्भाग्य से ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।
समापन में एक सवाल
हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है, जहां एक ओर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे नारे लगाए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर उसी बेटी को जान जोखिम में डालकर स्कूल भेजने पर मजबूर किया जा रहा है?
समय आ गया है कि प्रशासन इस विषय पर गंभीर हो, और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे। वरना कल को किसी नौनिहाल की तबीयत बिगड़ने या जान जाने पर सिर्फ अफसोस और जांच कमेटी ही हाथ लगेंगी – इंसाफ नहीं।
NGV PRAKASH NEWS इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता है और प्रशासन से अपील करता है कि वह मौजूदा हालात को देखते हुए तत्काल स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों की घोषणा करे और बच्चों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को रोके।
रिपोर्ट: ज्ञान, विशेष संवाददाता
NGV PRAKASH NEWS

