सऊदी अरब में 73 साल पुरानी शराबबंदी खत्म..

सऊदी अरब में 73 साल बाद खत्म होगी शराब बंदी, 600 जगहों पर शराब की बिक्री को मंजूरी – पर्यटन बढ़ाने के लिए क्राउन प्रिंस सलमान का ऐतिहासिक फैसला

26 मई 2025। सऊदी अरब ने 73 साल बाद अपने देश में शराब पर लगे प्रतिबंध को आंशिक रूप से खत्म करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस फैसले के तहत 600 जगहों पर शराब की बिक्री को अनुमति दी जाएगी। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) ने इस कदम को विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने और देश की अर्थव्यवस्था में विविधता लाने के उद्देश्य से लिया है।

सऊदी अरब में अभी तक शरीयत कानून के तहत शराब का सेवन और व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित था। इसके उल्लंघन पर कड़ी सजा और भारी जुर्माना लगाया जाता था। इस्लामी परंपराओं के मुताबिक शराब हराम मानी जाती है। लेकिन अब सरकार ने इस सख्त प्रतिबंध को आंशिक रूप से हटाने का निर्णय लिया है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, शराब की बिक्री और सेवन की अनुमति 2026 से कुछ चुनिंदा जगहों पर दी जाएगी। ये जगहें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और प्रवासियों के लिए होंगी, जिनमें फाइव-स्टार होटल, लग्जरी रिसॉर्ट्स, नियोम और रेड सी प्रोजेक्ट के तहत आने वाले पर्यटन स्थल शामिल हैं। सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने की अनुमति नहीं होगी और सऊदी नागरिकों और मुस्लिमों के लिए शराब पर प्रतिबंध जारी रहेगा।

सऊदी सरकार का मानना है कि 2030 में होने वाले एक्सपो और 2034 में आयोजित होने वाले फीफा वर्ल्ड कप के दौरान बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक सऊदी अरब आएंगे। ऐसे में उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुविधाएं देना जरूरी होगा। शराब लाइसेंसिंग कार्यक्रम को इसी तैयारी का हिस्सा बताया जा रहा है।

जानकारों का मानना है कि यह कदम सऊदी अरब के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर अपनी छवि को आधुनिक और उदार दिखाने की कोशिश है। हालांकि, कुछ धार्मिक समूहों और रूढ़िवादी धड़ों द्वारा इस फैसले का विरोध भी हो सकता है।

फिलहाल सऊदी अरब सरकार ने साफ किया है कि शराब केवल लाइसेंस प्राप्त 600 जगहों पर ही उपलब्ध होगी और इस पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। 2026 से लागू होने वाले इस कार्यक्रम को क्राउन प्रिंस के ‘विजन 2030’ के तहत देश की अर्थव्यवस्था को विविध और सशक्त बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सऊदी अरब में शराब प्रतिबंध की पृष्ठभूमि:

सऊदी अरब इस्लाम के पवित्र स्थलों (मक्का और मदीना) का घर है। शरीयत कानून सऊदी अरब की रीढ़ है, जिसके तहत शराब के सेवन और व्यापार पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ था। शराब पीना इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ माना जाता है, और इसका उल्लंघन करने पर भारी सजा दी जाती है। यह सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से एक गंभीर अपराध माना जाता है।

क्राउन प्रिंस सलमान के फैसले के पीछे की वजहें:

  1. 2030 विजन और पर्यटन
    क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का विजन 2030 सऊदी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने पर केंद्रित है। तेल पर निर्भरता कम करने के लिए पर्यटन, एंटरटेनमेंट और निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। शराब पर आंशिक छूट पर्यटन के इसी एजेंडे का हिस्सा है।
  2. अंतरराष्ट्रीय आयोजन

2030 एक्सपो: सऊदी अरब के लिए एक बड़ा मंच, जहां दुनियाभर के लोग आएंगे।

2034 फुटबॉल वर्ल्ड कप: खेल आयोजन को लेकर लाखों पर्यटकों के आने की उम्मीद है।

ऐसे आयोजनों में शराब की मांग बढ़ती है। पर्यटकों को वैश्विक मानकों की सुविधाएं देने के लिए शराब की अनुमति देना जरूरी समझा गया।

  1. राजस्व का नया स्रोत
    शराब लाइसेंसिंग और इससे जुड़ी टैक्स व्यवस्था से सरकार को राजस्व का नया जरिया मिलेगा। यह सऊदी अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद होगा।
  2. साफ-सुथरी छवि का निर्माण
    अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के नजरिए से शराब पर आंशिक छूट से एक उदार और आधुनिक छवि बनेगी। यह सऊदी को एक ‘ग्लोबल डेस्टिनेशन’ के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।

कैसे लागू होगी ये छूट?

600 जगहों को लाइसेंस दिया जाएगा।

ये जगहें मुख्य रूप से लग्जरी होटल, रिसॉर्ट्स, और अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स (जैसे नियोम, रेड सी प्रोजेक्ट) होंगी।

केवल गैर-मुस्लिम विदेशी पर्यटक और प्रवासी शराब खरीद और पी सकेंगे।

सार्वजनिक जगहों पर शराब की अनुमति नहीं होगी।

स्थानीय नागरिकों और मुस्लिमों पर शराब पर प्रतिबंध जारी रहेगा।

क्या होगा असर

पर्यटन को बूस्ट मिलेगा।

वैश्विक आयोजनों के लिए तैयार हो सकेगा।

सऊदी की अंतरराष्ट्रीय छवि को आधुनिकता का तड़का लगेगा।

चुनौतियां:

रूढ़िवादी धड़े इसका विरोध कर सकते हैं।

सामाजिक तनाव पैदा हो सकता है।

शराब की उपलब्धता को लेकर कानून-व्यवस्था की नई चुनौतियां आएंगी।

सऊदी अरब का ये कदम परंपरा और आधुनिकता के बीच एक संतुलन साधने की कोशिश है। यह सऊदी समाज में बड़े बदलाव की दस्तक है, जहां धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए वैश्विक जरूरतों को भी स्वीकार किया जा रहा है। क्राउन प्रिंस सलमान का यह फैसला बताता है कि सऊदी अरब अब एक सीमित रूप से उदार और ग्लोबल समाज की ओर कदम बढ़ा रहा है।

NGV PRAKASH NEWS

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