
गहरी साँझ थी, लेकिन बहादरपुर गांव की रजबहे में पसरा सन्नाटा उस वक्त चीख पड़ा जब पानी के बीच एक सिर कटी लाश तैरती दिखी। एक स्कूली सलवार, जेब में एक कागज और उस पर लिखा था—सिर्फ एक नंबर। परतापुर पुलिस उस वक्त नहीं जानती थी कि ये कागज एक पूरी त्रासदी का दरवाज़ा खोल देगा।
17 साल की आस्था उर्फ तनिष्का, कक्षा 12 की छात्रा, घर से लापता थी लेकिन इसकी रिपोर्ट तक नहीं लिखवाई गई थी। पिता रमेश कुमार सीआरपीएफ में तैनात हैं, फिलहाल छत्तीसगढ़ में। बेटी के गुम होने पर भी घर में अजीब सा मौन पसरा था, कोई हलचल नहीं, कोई शोर नहीं—जैसे कुछ छुपा हो।
परतापुर की रजबहे में जो लाश मिली, उसका सिर नदारद था। पर उसकी सलवार की जेब में मिला एक कागज का टुकड़ा, जिस पर हाथ से लिखा था एक मोबाइल नंबर। पुलिस ने जब उस नंबर पर कॉल किया, तो उधर से एक किशोर बोला—”मैं आस्था का दोस्त हूं।”
मौन परिजन, संदिग्ध रिश्ते
आस्था की पहचान उसके इसी किशोर दोस्त ने की, जबकि खुद परिवार वालों ने शव को पहचानने से इनकार कर दिया। पुलिस को यह बात खटक गई। इसके बाद पूछताछ शुरू हुई।
शक की सुई घूमी परिवार के भीतर। पुलिस ने मां राकेश देवी, दो नाबालिग भाई, दो मामा (कमल और समरपाल), और ममेरा भाई मंजीत उर्फ मोनू को हिरासत में ले लिया।
पुलिस के मुताबिक, आस्था का एक युवक से प्रेम-प्रसंग था। यह बात परिजनों को नागवार थी। और यहीं से बुनियाद रखी गई एक नृशंस साजिश की।
खामोश लाश और गवाही देती जेब
बृहस्पतिवार की सुबह जब सिर कटी लाश मिली, गांव में सनसनी फैल गई।
पुलिस ने रजबहे में घंटों सिर खोजने की कोशिश की, लेकिन कुछ हाथ नहीं आया।
अब तलाश चल रही है जानी गंगनहर में, जहां संभव है सिर को फेंका गया हो।
पूछताछ में ममेरा भाई मंजीत उर्फ मोनू ने पुलिस को कुछ अहम सुराग दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि परिवार ने इज्जत के नाम पर आस्था की हत्या कर दी। उसके बाद शव को पहचान से बचाने के लिए सिर काटा गया, ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके।
कई राज़ अभी बाकी हैं
पुलिस के सामने अभी भी कई सवाल हैं:
- हत्या कहां और कैसे की गई?
- सिर कहां है?
- क्या किशोर दोस्त को फंसाया जा रहा है?
- या वह भी कहीं इस खेल का हिस्सा था?
एसएसपी विपिन ताडा का कहना है कि परिवार के लोग अब भी सच छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। मगर पुलिस जल्द ही इस हत्याकांड की पूरी गुत्थी सुलझा लेगी।
एक छात्रा, एक प्रेम कहानी, एक रूढ़िवादी सोच, और एक वहशी अंत…
आस्था की कहानी खत्म हो गई, लेकिन उसका सवाल अब भी तैर रहा है—
क्या किसी की “इज्जत” के नाम पर उसकी जिंदगी इतनी सस्ती थी?
NGV PRAKASH NEWS

