
गाजियाबाद में फर्जी जमानत गिरोह का पर्दाफाश: 700 अपराधियों को दिला चुके थे बेल, 7 गिरफ्तार
गाजियाबाद, 06 जून 2025।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में अपराध की दुनिया से जुड़ी एक बड़ी साजिश का भंडाफोड़ हुआ है। क्राइम ब्रांच और थाना कविनगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे गिरोह का खुलासा हुआ है जो पिछले छह वर्षों से अपराधियों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमानत दिलाने का कारोबार चला रहा था। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है और इनके कब्जे से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज, मोहरें, लैपटॉप समेत अन्य सामग्री बरामद की गई है।
छह साल से चल रहा था फर्जीवाड़ा
पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पिछले छह सालों से इस काम में लिप्त थे और अब तक करीब 600 से 700 अपराधियों को फर्जी दस्तावेज़ों के जरिए जमानत दिलवा चुके हैं। गिरोह फर्जी खतौनी और आधार कार्ड तैयार करके अदालतों में पेश करता था। इसके लिए सीएससी जन सेवा केंद्र और थानों की फर्जी मोहरों का इस्तेमाल किया जाता था ताकि दस्तावेज असली प्रतीत हों।
फर्जी दस्तावेज की पूरी फैक्ट्री
गिरफ्तार आरोपियों में मेरठ निवासी अनोज यादव गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। पहले वह नोएडा की एक कंपनी में डिजाइनर सुपरवाइजर था, लेकिन नौकरी छूटने के बाद उसने अपराध की राह पकड़ ली। वहीं, विकास उर्फ सम्राट दस्तावेजों की फर्जी तैयारी में माहिर था। पुलिस ने इनके पास से जो सामग्री बरामद की है, वह एक व्यवस्थित और पेशेवर स्तर के अपराध की ओर इशारा करती है। बरामद सामानों में शामिल हैं:
- 21 फर्जी आधार कार्ड
- 18 फर्जी खतौनी
- 5 बिना भरे बेल बॉन्ड
- 5 रसीद टिकट
- 10 थानों और विभागीय फर्जी मोहरें
- एक लैपटॉप और स्टाम्प पैड
5 से 10 हजार में होती थी ‘बेल डील’
गिरोह का काम करने का तरीका बेहद संगठित था। पहले आरोपी से उसकी जमानत राशि के अनुसार 5 से 10 हजार रुपये तक की रकम ली जाती थी। इसके बाद भूलेख विभाग से असली खतौनी के आधार पर फर्जी खतौनी और आधार कार्ड तैयार किए जाते थे। फिर उन दस्तावेजों पर सीएससी जन सेवा केंद्र की और थानों की फर्जी मोहरें लगाकर पूरी प्रक्रिया को असली जैसा दिखाया जाता था।
गिरोह के सदस्य और पुलिस की अगली रणनीति
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान इस प्रकार की गई है:
- अनोज यादव (मेरठ)
- इसरार (गाजियाबाद)
- बबलू, लोकेन्द्र, राहुल शर्मा, सुनील कुमार (मोदीनगर)
- विकास राजपूत
पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। वहीं, जमानत पर बाहर आए 700 के करीब जिन अपराधियों को इस गिरोह ने फर्जी तरीके से छुड़वाया था, उनकी भी सूची तैयार की जा रही है ताकि पुनः जांच के आधार पर कानूनी कार्यवाही की जा सके।
यह मामला न केवल न्यायिक व्यवस्था में सेंध का बड़ा उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि तकनीक और सरकारी दस्तावेजों का दुरुपयोग किस कदर खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है।
NGV PRAKASH NEWS

