क्या था उस रद्दी कागज में जिसे 2 दोस्तों ने 31 लाख में खरीदा..???

₹31 लाख में खरीदी रद्दी – दो युवकों का ‘विदेशी सपना’, दिल्ली से गुजरात तक मच गया बवाल!

दिल्ली एयरपोर्ट पर उस रात कुछ अलग ही किस्म का ‘इंटरनेशनल ड्रामा’ चल रहा था। दो युवक एयरपोर्ट पर बड़े ठाठ से पहुंचे, चेहरे पर इत्मिनान, आंखों में इटली का सपना और जेब में रद्दी से भी सस्ता कागज — यानी फर्जी वीजा!

जी हां, पंजाब के होशियारपुर से निकले तरनवीर सिंह और गगनदीप सिंह का सपना था रोम की गलियों में घूमने का, लेकिन किस्मत ने उन्हें दिल्ली के हवालात की सलाखों तक पहुंचा दिया। वजह? एक शातिर एजेंट से खरीदा गया फर्जी शेंगेन वीजा, जिसकी कीमत थी पूरे ₹31 लाख रुपये! यानी दोनों ने मिलकर एक-एक कागज के टुकड़े पर लगभग ₹15.5 लाख लुटा दिए — वो भी सिर्फ एयरपोर्ट पर पकड़े जाने के लिए!

रोम जाने चले थे, रुक गए रडार पर

20-21 मई की रात, जब ये दोनों IGI एयरपोर्ट पर दोहा के रास्ते रोम के लिए उड़ान भरने पहुंचे, तो इमिग्रेशन वालों ने उनके दस्तावेजों की चाय छान डाली। वीजा स्कैन हुआ, शक हुआ, और फिर ‘कटाक्ष’ नहीं, हिरासत हुई।

पर्दे के पीछे से निकला ‘वीजा माफिया यूनिवर्स’

पूछताछ में सामने आया कि दोनों ने कमलकांत सुरेशबाबू झा नाम के एक एजेंट से वीजा लिया था — और वो भी गुजरात में मिले थे, VFS दफ्तर के बाहर। मतलब इटली जाने के लिए पंजाब के छोरे गुजरात आए, और अब दिल्ली में फंसे पड़े हैं। कमाल है ग्लोबल कनेक्शन का!

कमलकांत ने अहमदाबाद में इनका बायोमेट्रिक, डॉक्युमेंटेशन सब कुछ ‘ऑफिशियल’ स्टाइल में करवाया। जब असली वीजा रिजेक्ट हुआ, तो ‘सीधा जुगाड़’ निकाला और फर्जी वीजा लगाकर बोला — “भाई, अब उड़ लो!”

पुलिस बनी तेज़, आरोपी बना तेजतर्रार

दिल्ली पुलिस ने जब देखा कि मामला इंटरस्टेट और इंटरनेशनल दोनों है, तो हाथ-पैर फटाफट चलाए। गुजरात के कई ठिकानों पर छापे मारे, पर कमलकांत ने भी पुलिस को खूब छकाया। आखिरकार, वो दिल्ली में ही धर लिया गया — जैसे कोई फिल्म का क्लाइमैक्स हो!

दसवीं पास और फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड

कमलकांत, उम्र 22, पढ़ाई सिर्फ 10वीं तक, पर दिमाग ऐसा चला कि इंटरनेशनल स्कैम खड़ा कर दिया। ग्राफिक डिजाइन में डिप्लोमा किया और फिर मिल गया पंजाब के लल्ली उर्फ रविंदर सिंह से — जो खुद एजेंट था। लल्ली ने कहा, “फर्जी वीजा बना दो, पैसे मिलेंगे ₹15 लाख।”

बाकी एजेंटों की मदद से फर्जी डॉक्युमेंट तैयार किए गए, वीजा चिपकाया गया और युवाओं को सपनों के साथ रवाना कर दिया गया — लेकिन वो सपना तो एयरपोर्ट के डिटेंशन रूम में टूट गया।


नोट: अगर आपका भी कोई ‘विदेश घूमने’ का सपना है, तो भाई पहले पासपोर्ट बनाओ, फिर वीजा सही तरीके से लो। वरना अगला टिकट रोम का नहीं, रिमांड का होगा!

NGV PRAKASH NEWS

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