तीन दलित नाबालिकों को खंभे से बांध कर 60 लोगों ने पीटा : एक ने खा लिया जहर

कर्नाटक की जातीय हिंसा ने झकझोरा देश: दलित नाबालिगों को खंभे से बांधकर पीटा, एक ने खाया जहर

गडग, कर्नाटक। 7 जून 25.
कभी-कभी इंसानियत इतनी शर्मसार हो जाती है कि शब्द भी उस पीड़ा को बयां नहीं कर पाते। कर्नाटक के गडग जिले के हरोगेरी गांव में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को दहला दिया है। यहां तीन दलित नाबालिग लड़कों को ऊंची जाति की एक लड़की को कथित तौर पर अश्लील मैसेज भेजने के आरोप में न सिर्फ खंभे से बांधकर पीटा गया, बल्कि इतना अपमानित किया गया कि एक लड़के ने ज़हर खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की।

यह घटना 28 मई को हुई, लेकिन इसकी भनक तब लगी जब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जो दिखा, वो समाज की उस सड़ांध को उजागर करता है जो आज भी जातिवाद की दीवारों में कैद है। 60 लोगों की भीड़ ने इन तीन लड़कों को गांव की ग्राम पंचायत के झंडे वाले खंभे से बांध दिया और फिर डंडों, चप्पलों और रस्सियों से बेहरमी से पीटा।

जातिवाद के नाम पर इंसाफ या बर्बरता?
पुलिस के अनुसार, इन दलित लड़कों पर आरोप था कि उन्होंने एक ऊंची जाति की लड़की को कथित तौर पर अश्लील मैसेज भेजे थे। लेकिन क्या आरोपों की जांच किए बिना बच्चों को पीट-पीटकर लहूलुहान कर देना इंसाफ है या भीड़तंत्र की बर्बरता?

नरगुंड थाने के इंस्पेक्टर बी. मंजुनाथ ने बताया कि इस मामले में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, BNS की धाराएं और POCSO एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अब तक 12 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि बाकी फरार आरोपियों की तलाश जारी है। POCSO के तहत कुल 30 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

भीड़ की बर्बरता, प्रशासन की सुस्ती
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि जब वे बच्चों को बचाने पहुंचे, तो उन्हें भी धमकाया गया और गांव से खदेड़ दिया गया। एक पीड़ित पिता ने कहा, “हमारे गांव में आज भी छुआछूत जिंदा है। हमें इंसान नहीं समझा जाता। ये हमला उसी सोच की उपज है।”

वहीं, एक पीड़ित बच्चे ने सामाजिक अपमान और डर के चलते ज़हर खा लिया। उसे हबल्ली के KIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

वीडियो वायरल होने पर मचा बवाल
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में गांव के प्रभावशाली लोग मामले को दबाने की कोशिश कर रहे थे। कुछ ने आपसी समझौते की पेशकश की, लेकिन जैसे ही वीडियो सामने आया, पुलिस और प्रशासन को मजबूरी में कार्रवाई करनी पड़ी।

न्याय की पुकार
यह घटना सिर्फ कर्नाटक नहीं, पूरे भारत के लिए आईना है। जहां संविधान बराबरी का हक देता है, वहीं समाज में जाति के नाम पर आज भी ऐसा हिंसक अन्याय हो रहा है। सवाल सिर्फ तीन बच्चों का नहीं है, सवाल उस सोच का है जो आज भी ‘जाति’ के तराजू पर इंसानियत को तोलती है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या इस मामले में दोषियों को सख्त सजा मिलेगी या यह घटना भी धीरे-धीरे खबरों से गुम हो जाएगी?

NGV PRAKASH NEWS

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