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सांसद चंद्रशेखर आज़ाद पर डॉ. रोहिणी घावरी के गंभीर आरोप: शादी का झांसा, भावनात्मक शोषण और सियासी हलचल
नई दिल्ली/नगीना।
नगीना से सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद एक बार फिर विवादों में घिरते नज़र आ रहे हैं। इस बार मामला बेहद संवेदनशील और गंभीर है, क्योंकि इंदौर की पीएचडी स्कॉलर डॉ. रोहिणी घावरी ने उन पर शादी का झांसा देकर भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक शोषण करने जैसे आरोप लगाए हैं। मामला अब राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंच गया है, जहां डॉ. रोहिणी ने न्याय की गुहार लगाई है।
विदेश से शुरू हुई जान-पहचान, विश्वास का टूटा दायरा
डॉ. रोहिणी घावरी ने अपनी शिकायत में खुलासा किया है कि वर्ष 2020 में जब वह स्विट्जरलैंड के जिनेवा में पीएचडी करने गई थीं, तब उनकी मुलाकात चंद्रशेखर से हुई। जून 2021 से दोनों के बीच संवाद बढ़ा और धीरे-धीरे यह संबंध विश्वास और नज़दीकियों तक पहुंच गया। आरोपों के मुताबिक, चंद्रशेखर ने खुद को अविवाहित बताया और विवाह का वादा कर रोहिणी के प्रेम व समर्पण का लाभ उठाया।
दिल्ली में शोषण और मानसिक प्रताड़ना के आरोप
भारत लौटने के बाद रोहिणी का आरोप है कि चंद्रशेखर ने दिल्ली के होटलों और अपने निवास पर उन्हें बुलाकर संबंध बनाए और लगातार विवाह का आश्वासन देते रहे। लेकिन 2022 के चुनावों के दौरान जब रोहिणी को चंद्रशेखर की शादीशुदा ज़िंदगी की जानकारी मिली, तो उन्होंने जवाब मांगा। इस पर चंद्रशेखर ने इंकार किया और खुद को केवल रोहिणी से ही विवाह करने योग्य बताया।
डॉ. रोहिणी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने यह संबंध समाप्त करने की बात कही तो चंद्रशेखर ने आत्महत्या की धमकी दी और बहुजन आंदोलन छोड़ने जैसी बातें कहकर मानसिक दबाव बनाया।
सामाजिक बदनामी और अवसाद में डूबी ज़िंदगी
शिकायत में डॉ. रोहिणी ने लिखा है कि चंद्रशेखर ने न केवल उनके प्रेम और भरोसे का गलत फायदा उठाया बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से बदनाम करने की स्थिति में पहुंचा दिया। वह यह भी कहती हैं कि लोग अब उन्हें अपमानजनक शब्दों से बुलाते हैं, जिससे वह अवसाद में चली गईं और दो बार आत्महत्या की कोशिश की।
राजनीतिक हलचल और राष्ट्रीय महिला आयोग से गुहार
यह मामला अब सियासी रंग भी पकड़ने लगा है। जहां चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि वे इस प्रकरण में अदालत में जवाब देंगे, वहीं दूसरी ओर डॉ. रोहिणी राष्ट्रीय महिला आयोग से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि वह मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से पूरी तरह टूट चुकी हैं और अब न्याय चाहती हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो इस प्रकरण का असर न केवल चंद्रशेखर की राजनीतिक साख पर पड़ेगा, बल्कि यह बहुजन राजनीति में भी हलचल मचा सकता है।
क्या कहते हैं कानूनविद?
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं जैसे धोखाधड़ी, मानसिक प्रताड़ना, महिला शोषण और धमकी के तहत दंडनीय अपराध बन सकता है।
👉 विशेष टिप्पणी:
यह मामला दिखाता है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नेताओं से जुड़े व्यक्तिगत विवाद कैसे सामाजिक विमर्श और न्याय व्यवस्था का विषय बन सकते हैं। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया का पालन आवश्यक है ताकि पीड़ित को न्याय मिले और सच्चाई सामने आ सके |
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