

थूक मिलाकर दूध बेचने का मामला: लखनऊ में धर्म आस्था पर चोट, रासुका की मांग तेज
लखनऊ | 05 जुलाई 2025 | NGV PRAKASH NEWS
राजधानी लखनऊ के गोमती नगर इलाके में एक बेहद सनसनीखेज और धार्मिक भावना को आहत करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति पर दूध में थूक मिलाकर बेचने का आरोप लगा है, जो बांके बिहारी और श्रावण माह की कांवड़ यात्रा के दौरान शंकर भगवान के अभिषेक में प्रयुक्त होता था।
लव शुक्ला नामक स्थानीय व्यक्ति ने यह खुलासा किया कि वह इस दूध से शंकर जी का अभिषेक करते थे, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि दूध में थूक मिलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि इससे उनका धर्म भ्रष्ट हुआ है और आस्था को ठेस पहुंची है। उन्होंने आरोपी पर सख्त कार्रवाई और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की मांग की है।
पप्पू नहीं, मोहम्मद शरीफ निकला आरोपी
मामले की तह में जाने पर सामने आया कि जिस व्यक्ति से लव शुक्ला दूध लेते थे, वह खुद को ‘पप्पू’ बताता था। लेकिन जांच में पता चला कि उसका असली नाम मोहम्मद शरीफ है, जो धोखे से हिंदू नाम अपनाकर दूध वितरित करता था। पीड़ित परिवार ने थूक मिलाने का आरोप लगाते हुए गोमती नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस के अनुसार, इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी बरामद हुआ है, जिससे आरोपों को बल मिला है।
हिंदू महासभा का विरोध, थाने पर प्रदर्शन
जैसे ही यह मामला प्रकाश में आया, अखिल भारत हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने गोमती नगर थाने पर प्रदर्शन किया। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिष्य चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि “थूक जिहाद” देश में तेजी से फैल रहा है। उन्होंने कहा कि जब धार्मिक कार्यों के लिए उपयोग होने वाले दूध में जानबूझकर थूक मिलाया जाता है, तो यह न केवल आस्था पर हमला है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मामला है।
पुलिस ने कहा – जांच जारी, सीसीटीवी मिला
इस पूरे मामले पर डीसीपी वेस्ट जोन शशांक सिंह ने कहा कि शिकायत दर्ज की जा चुकी है और आरोपी की पहचान व सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर उचित धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।
विश्लेषण | धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
ऐसे मामलों में सिर्फ कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समाज में धार्मिक सहिष्णुता व पारदर्शिता बनाए रखना भी ज़रूरी है। यदि दूध जैसे पवित्र उपयोग के पदार्थ में जानबूझकर थूक मिलाया गया है, तो यह एक समुदाय विशेष को बदनाम करने वाला नहीं बल्कि व्यक्ति विशेष की मानसिक विकृति का मामला भी है।
सवाल यह भी उठता है कि धार्मिक कार्यों में प्रयोग होने वाली सामग्री की गुणवत्ता और स्रोत की जांच की कोई समुचित व्यवस्था क्यों नहीं है? क्या प्रशासन अब ऐसे मामलों को रोकने के लिए कोई विशेष सतर्कता बरतेगा?
जांच के बाद सच्चाई सामने आने पर ही स्पष्ट होगा कि यह मामला किस हद तक दुर्भावना से प्रेरित था। लेकिन यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल आपराधिक मामला होगा, बल्कि सामाजिक सद्भाव को चोट पहुंचाने वाला गंभीर अपराध भी।
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