👉 इस तरह खुला हत्या का राज..


पूर्णिया की हैवानियत: डायन बताकर पूरे परिवार को जिंदा जलाया, बच्चा नहीं बताता तो दफन हो जाती दरिंदगी
✍️ रिपोर्ट: NGV PRAKASH NEWS
पूर्णिया, बिहार — बिहार के पूर्णिया जिले के रानीपतरा टेटगामा गांव में रविवार रात जो कुछ हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया। अंधविश्वास की आग में झुलसकर एक ही परिवार के पांच लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई। शवों को बोरे में भरकर तालाब में फेंक दिया गया, और पूरे गांव ने इस खौफनाक साजिश पर खामोशी की चादर तान ली।
सब कुछ ऐसे दफन हो जाता, जैसे कुछ हुआ ही नहीं, अगर परिवार का इकलौता जीवित बचा 16 वर्षीय किशोर सोनू कुमार डरते-डरते सुबह 5 बजे पुलिस को फोन नहीं करता। पुलिस जब गांव पहुंची, तो न सिर्फ शव मिले, बल्कि इंसानियत के नाम पर बर्बरता का एक गंदा धब्बा भी सामने आया।
🔥 हत्या की दिल दहला देने वाली कहानी
रविवार रात करीब 10 बजे, गांव के 40-50 लोग बाबूलाल उरांव के घर पर पहुंचे। ग्रामीणों को शक था कि बाबूलाल की पत्नी सीता देवी ‘डायन’ है, और हाल के दिनों में गांव में हुई बच्चों की मौतों का जिम्मेदार उसे ही माना गया।
सभी ने मिलकर घर में घुसकर पहले मारपीट की, फिर पांचों लोगों को पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जला दिया —
- 70 वर्षीय कातो देवी (बुजुर्ग महिला)
- 50 वर्षीय बाबूलाल उरांव (परिवार के मुखिया)
- 40 वर्षीय सीता देवी (जिन्हें डायन कहा गया)
- 30 वर्षीय मनजीत कुमार (बेटा)
- 25 वर्षीय रानी देवी (बहू)
इसके बाद अधजले शवों को बोरे में भरकर जलकुंभी से भरे एक तालाब में फेंक दिया गया।
👦 एक बच्चे की हिम्मत से खुला राज
इस भयावह घटना के बाद गांव सन्नाटे में डूब गया — कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं था। लोग गांव छोड़कर भाग गए।
लेकिन परिवार का एकमात्र जीवित सदस्य, सोनू कुमार, जो मौके से भागकर अपने ननिहाल पहुंचा था, उसने सुबह पुलिस को कॉल कर सारी सच्चाई बताई।
🚔 पुलिस कार्रवाई
पुलिस को सोनू की सूचना पर गांव की संलिप्तता का अंदेशा हुआ।
- नकुल उरांव और ट्रैक्टर मालिक सन्नाउल्लाह को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
- इनकी निशानदेही पर लाशें बरामद की गईं।
- पांचों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
- गांव के अन्य अभियुक्तों की तलाश तेज़ कर दी गई है, जो घटना के बाद फरार हैं।
🧙♀️ “डायन” का अंधविश्वास बना हत्या का औज़ार
गांववालों का कहना है कि सीता देवी पर वर्षों से डायन होने का शक था।
हाल के महीनों में गांव में कुछ बच्चों की मौत हुई थी, जिससे अंधविश्वासी ग्रामीणों ने उसे मौत का कारण मान लिया।
रविवार को भी एक कहासुनी के बाद भीड़ ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं।
❗ यह केवल हत्या नहीं, समाज की चुप्पी की भी सजा है
पूर्णिया की यह घटना बताती है कि अंधविश्वास, सामूहिक उन्माद और कानून से दूर होता समाज कितना खतरनाक हो सकता है।
एक पूरा गांव खामोश रहा — कोई प्रतिरोध नहीं, कोई मदद नहीं। अगर सोनू न होता, तो शायद यह मामला भी इतिहास की कब्र में गुम हो जाता।
➡️ अब ज़रूरत है कि बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन न सिर्फ इस जघन्य अपराध के दोषियों को सख्त सजा दिलाए, बल्कि अंधविश्वास और डायन प्रथा जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे।
🟥 NGV PRAKASH NEWS की यह विशेष रिपोर्ट एक सवाल छोड़ती है —
क्या हम आज भी 21वीं सदी में हैं? या अब भी अंधविश्वास में जलते हुए इंसान को चुपचाप देख रहे हैं?
📍 NGV PRAKASH NEWS — सच के साथ, निर्भयता के साथ।
