

Gyan Prakash Dubey
स्थान: बस्ती, दिनांक: 09 जुलाई 2025
NGV PRAKASH NEWS विशेष रिपोर्ट
अपराध चाहे जितना भी शातिर हो, न्याय की आँखों से बच नहीं सकता। बस्ती जनपद में ऐसा ही एक मामला सामने आया जहाँ पुलिस की सतर्कता, तकनीकी सहायता और सामूहिक प्रयासों से एक संगठित चोरी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। दुबौलिया थाना पुलिस, एसओजी टीम और सर्विलांस सेल की संयुक्त कार्यवाही ने न केवल चोरी की श्रृंखलाबद्ध घटनाओं को उजागर किया, बल्कि अपराधियों के उस नेटवर्क को भी बेनकाब किया, जो जनपद बस्ती ही नहीं, बल्कि अयोध्या और अम्बेडकरनगर तक फैला था।
इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत हुई 8 जुलाई की रात को, जब पुलिस को एक खास इनपुट मिला। टेढ़वा पुलिया के पास जबरदस्त घेराबंदी कर तीन अभियुक्तों – अनिल निषाद, राहुल निषाद और वीरू निषाद को चोरी के सामान, नकदी, मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल के साथ गिरफ्तार किया गया। इनके पास से बरामद हुआ पीली धातु (सोने के आभूषण), पाजेब, बिछिया, नगदी ₹33,700 और चार एंड्रॉयड मोबाइल – सबूत बन गए उनके काले कारनामों के।
👉अपर पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह बताया कि
जब पुलिस ने इनसे सख्ती से पूछताछ की, तो एक नया नाम सामने आया – अवधेश कुमार अग्रहरी, जो दुबौलिया बाजार में ज्वैलर्स की दुकान चलाता है। वह इस चोरी के माल का खरीदार था। रात के करीब 11.20 बजे पुलिस ने उसे उसकी दुकान से गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी दिखाती है कि जब कानून सख्त इरादे से चले, तो अपराध की जड़ें भी उखड़ जाती हैं।
यह गिरोह कोई नया नहीं था। अप्रैल से लेकर जुलाई तक, इन्होंने बस्ती के छावनी, हरैया, रुधौली, गजपुर, सुबरहा, बंजरिया सूबी क्षेत्रों में घरों और दुकानों को निशाना बनाया। अयोध्या के शेरवाघाट और अम्बेडकरनगर के आलापुर क्षेत्र भी इनके निशाने पर रहे। मेडिकल स्टोर से लेकर ज्वैलरी शॉप, ग्रामीण घरों से लेकर मोटरसाइकिल – इनका कोई भेदभाव नहीं था।
सबसे खास बात ये रही कि चोरी के बाद ये अपने माल को नेपाल तक पहुंचा देते थे। वहीं बेचकर रुपये भारत वापस लाते थे। जो गहने बचते थे, उन्हें अवधेश जैसे सुनारों को बेच देते थे। अपराध और व्यापार का ऐसा संगम एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है।
उन्होंने कहा
पूछताछ में तीनों अभियुक्तों ने न केवल जुर्म कबूल किया, बल्कि बताया कि वे आर्थिक तंगी और निजी शौक पूरे करने के लिए चोरी करते थे। चोरी के पैसे से मौज-मस्ती करना, मोटरसाइकिल खरीदना और मोबाइल बदलना – यही इनका जीवन दर्शन बन गया था।
अपराध से अधिक गंभीर इनकी मानसिकता थी – बार-बार गिरफ्तारी के बावजूद जुर्म की राह से न हटना। इनमें राहुल निषाद तो जैसे अपराध के पाठ्यक्रम का ‘स्वर्ण पदक विजेता’ निकला। उसके ऊपर अकेले 16 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें पॉक्सो, आयुध अधिनियम से लेकर बीएनएस की गंभीर धाराएं शामिल हैं।
इस सफलता का श्रेय जाता है थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार सिंह और उनकी बहादुर टीम को, जिसमें एसओजी प्रभारी चन्द्रकांत पांडेय, सर्विलांस प्रभारी शशिकांत, निरीक्षक अजय यादव से लेकर जवान संतोष यादव और दीपक कुमार तक शामिल हैं। इनकी तकनीकी दक्षता, संयोजन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बिना यह गिरफ्तारी संभव नहीं थी।
बस्ती पुलिस की यह कार्यवाही न केवल कानून व्यवस्था की बहाली की दिशा में मील का पत्थर है, बल्कि यह समाज को भी यह संदेश देती है कि अपराध कोई समाधान नहीं है। पुलिस की सूझबूझ और तकनीकी निगरानी के युग में कोई भी अपराध अब गुमनाम नहीं रह सकता।
यह घटना एक आत्ममंथन का अवसर भी है – क्या हम अपने युवाओं को सही दिशा दे पा रहे हैं? क्या सुनार जैसे व्यवसायी, जिन पर जनता भरोसा करती है, वे लालच में समाज को खोखला करने में भागीदार बनते जा रहे हैं?
आज जब चार अपराधी सलाखों के पीछे हैं, तो यह सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि समाज के प्रति विश्वास की पुनर्स्थापना है। उम्मीद है कि आगे भी ऐसी कार्यवाहियाँ अपराधियों में डर और समाज में भरोसा पैदा करेंगी।
NGV PRAKASH NEWS
