NGV PRAKASH NEWS

खाकी पर दाग: मेरठ में दो सब-इंस्पेक्टरों पर धागा व्यापारी से 20 लाख की उगाही का आरोप, 15 लाख बरामद कर फरार
मेरठ, 11 फरवरी 2026.
मेरठ के लोहिया नगर थाने से सामने आया एक सनसनीखेज मामला पुलिस महकमे को कठघरे में खड़ा कर गया है। आरोप है कि थाने में तैनात दो सब-इंस्पेक्टरों ने एक धागा व्यापारी का अपहरण कर उससे 20 लाख रुपये की उगाही की। मामला उजागर होते ही विभाग में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा। जिस खाकी पर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी है, उसी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला तब सामने आया जब सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस अविनाश पांडेय को गोपनीय सूचना मिली कि एक कारोबारी से अवैध वसूली की गई है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए शहर पुलिस अधीक्षक ने व्यापारी को बुलाकर पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी ली। प्रारंभिक तथ्यों में गड़बड़ी के संकेत मिलने पर गोपनीय जांच बैठा दी गई। जांच के निष्कर्ष चौंकाने वाले रहे।
जांच में लोहिया नगर थाने में तैनात दो सब-इंस्पेक्टरों की संलिप्तता सामने आई। दोनों की पहचान महेश और लोकेन्द्र साहू के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों 2023 बैच के अधिकारी हैं। आरोपों की पुष्टि होते ही उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई, लेकिन कार्रवाई से पहले ही दोनों फरार हो गए। फिलहाल पुलिस की टीमें उनकी तलाश में जुटी हैं।
जानकारी के अनुसार पीड़ित रासिक, जो लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र का निवासी है, धागे का कारोबारी है और उसका व्यापार दुबई तक फैला हुआ है।
पुलिस जांच में सामने आया कि जमीन बिक्री से बड़ी रकम मिलने की जानकारी आरोपित अधिकारियों तक पहुंची थी। इसी सूचना के आधार पर व्यापारी को कथित रूप से अगवा किया गया और उसे फर्जी गोल्ड स्मगलिंग केस में फंसाने की धमकी दी गई। भय और दबाव के माहौल में उससे 20 लाख रुपये वसूले गए।
आरोप है कि 20 लाख लेने के बाद भी दोनों सब-इंस्पेक्टरों ने 10 लाख रुपये और मांगे। व्यापारी को जेल भेजने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। लगातार बढ़ते दबाव के बाद व्यापारी ने उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाई, जिसके बाद मामला खुलकर सामने आया।
जांच टीम ने तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिनमें व्यापारी और दोनों आरोपित अधिकारियों की एक ही स्थान पर मौजूदगी की पुष्टि हुई। इन तकनीकी प्रमाणों ने मामले को मजबूत आधार दिया। पूछताछ के दौरान पुलिस ने 15 लाख रुपये बरामद किए, जिन्हें कथित उगाही की रकम बताया जा रहा है। हालांकि, शेष रकम लाने के बहाने दोनों आरोपित मौके से फरार हो गए।
दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(5) और 308(6) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। ये धाराएं किसी व्यक्ति को गंभीर नुकसान या झूठे आरोप में फंसाने की धमकी देकर उगाही से संबंधित हैं। मामला दर्ज होने के बाद विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून सबके लिए समान है।
एसएसपी अविनाश पांडेय ने यह भी संकेत दिया है कि लोहिया नगर थाने के प्रभारी की भूमिका की जांच की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि कहीं इस पूरे घटनाक्रम में जानकारी, मिलीभगत या लापरवाही का तत्व तो शामिल नहीं था। विभाग इस प्रकरण को उदाहरण के तौर पर देख रहा है, ताकि भविष्य में खाकी की आड़ में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि पर सख्त अंकुश लगाया जा सके।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि फरार सब-इंस्पेक्टर कब तक कानून से बच पाते हैं और विभाग इस मामले में कितनी पारदर्शिता और कठोरता दिखाता है।
NGV PRAKASH NEWS
