

सीधी की गर्भवती लीला की गुहार और नेताओं की बेरुखी: सड़क के लिए संघर्ष, मगर जवाब में तंज और टालमटोल
सीधी (मध्य प्रदेश), 11 जुलाई 2025 | NGV PRAKASH NEWS
“जनता के पैरों में झुकने वाले नेता अब जनता की तकलीफ पर सीना तानकर बोलते हैं” — मध्य प्रदेश के सीधी जिले की गर्भवती लीला साहू के वीडियो ने जब यह संदेश सोशल मीडिया पर फैलाया, तो यह किसी व्यक्तिगत पीड़ा से ज़्यादा व्यवस्था की संवेदनहीनता पर एक करारा तमाचा बन गया। एक साल से सड़क की मांग कर रही लीला को उम्मीद थी कि उसके गांव तक सड़क बन जाएगी, लेकिन जवाब में जो आया, वो सरकारी असंवेदनशीलता का भयानक नमूना है।
लीला साहू ने पहली बार एक साल पहले वीडियो बनाकर अपने गांव में सड़क की मांग की थी। अधिकारियों ने आश्वासन दिया, पर सड़क नहीं बनी। अब जब प्रसव का समय निकट है, लीला ने एक बार फिर वीडियो बनाकर चेताया, लेकिन इस बार जवाब में तंज और उपेक्षा मिली।
सांसद का जवाब: डिलीवरी डेट दो, हम अस्पताल में भर्ती करवा देंगे!
सीधी से बीजेपी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने लीला साहू के वीडियो पर जवाब देते हुए कहा – “डिलीवरी डेट बता दो, एक हफ्ते पहले उठवा कर अस्पताल में भर्ती करवा देंगे। हमारे पास एंबुलेंस है, अस्पताल है, आशा कार्यकर्ता है। चिंता क्यों कर रही हो?” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि “मैं सड़क नहीं बनाता, सड़क तो इंजीनियर और ठेकेदार बनाते हैं।”
इतना ही नहीं, उन्होंने सारा दोष पिछली सरकार और कांग्रेस पर डाल दिया, जबकि यह तथ्य है कि सीधी से पहले भी बीजेपी की ही रीति पाठक सांसद थीं। मिश्रा ने यह भी तंज कसा कि – “सोशल मीडिया पर किसी को वायरल होना है, तो वीडियो बनाता रहे।”
PWD मंत्री की दलील: ‘तो क्या सोशल मीडिया पोस्ट देखकर सड़क बना देंगे?’
प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बजट सीमित है, और “सोशल मीडिया पर कोई कुछ भी पोस्ट कर दे, तो क्या हम सीमेंट और डंपर लेकर वहां पहुंच जाएं?” उन्होंने कहा कि विभाग की अपनी सीमाएं होती हैं और हर मांग को इस तरह नहीं पूरा किया जा सकता।
लीला का जवाब: ‘डबल इंजन सरकार से उम्मीद थी, मगर सड़क नहीं आई’
लीला साहू ने सांसद पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा – “मैंने आपको वोट दिया है। देश और प्रदेश में डबल इंजन की सरकार है, लेकिन हमारे गांव में सड़क तक नहीं पहुंची। गांव में 6 महिलाएं गर्भवती हैं, एंबुलेंस भी नहीं आ सकती, अगर कोई अनहोनी हुई, तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।”
ज़मीनी हकीकत: 10 किलोमीटर तक नहीं है सड़क, पैदल चलना भी मुश्किल
सीधी जिले के जिस गांव से यह मामला आया है, वहां लगभग 10 किलोमीटर तक सड़क नहीं है। बरसात में हालात और खराब हो जाते हैं। वाहन फंस जाते हैं, ग्रामीणों को बीमार और गर्भवती महिलाओं को स्ट्रेचर या चारपाई से अस्पताल तक ले जाना पड़ता है। राज्य सरकार की अंत्योदय योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाएं यहां नाम मात्र की लगती हैं।
क्या सिर्फ वायरल होने पर मिलेगा जवाब, या असली विकास भी आएगा?
यह सवाल अब हर उस गांव और हर उस व्यक्ति का है, जो सालों से बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है – क्या भारत में अब सड़क, पानी, बिजली जैसी जरूरतें तभी पूरी होंगी जब कोई वीडियो वायरल होगा? और जब कोई आवाज़ उठाएगा, तो जवाब में सत्ता में बैठे लोग तंज कसेंगे, सवाल टालेंगे?
सवाल यह नहीं है कि लीला साहू को सड़क चाहिए या अस्पताल की सुविधा — सवाल यह है कि जब लोकतंत्र में जनता सवाल पूछती है, तो सत्ता उसे जवाबदेही क्यों नहीं, बल्कि ताने क्यों देती है?
रिपोर्ट: NGV PRAKASH NEWS
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