आवास योजना में फर्जी रिपोर्टिंग का शिकार रिक्शा चालक : दर-दर भटकने को मजबूर..

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आवास योजना में फर्जी रिपोर्टिंग का शिकार हुआ गरीब रिक्शा चालक, न्याय की आस में दर-दर भटक रहा

कानपुर नगर, 26 अगस्त 2025

सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े गरीब और बेघर लोगों को छत उपलब्ध कराना है। लेकिन जब व्यवस्था ही संवेदनहीन और लापरवाह हो जाए, तो इन योजनाओं का असली लाभ उठाने वाले सबसे वंचित लोग हताश और निराश हो जाते हैं। कानपुर नगर का एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वर्षों से संघर्षरत रिक्शा चालक

कानपुर नगर के निवासी सरवन कुमार गुप्ता रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। गरीबी और अभाव में बीता उनका जीवन अब और कठिन हो गया है। सरवन बताते हैं कि उन्होंने समाज में शोषण और प्रशासनिक उत्पीड़न वर्षों तक सहा है। इन सबका असर उनकी मानसिक स्थिति पर भी पड़ा है, लेकिन फिर भी वे अपने अधिकार के लिए लगातार संघर्षरत हैं।

आवास योजना में नाम आने के बाद भी घर नहीं मिला

सरवन गुप्ता ने कई बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर आवास की मांग की। वर्ष 2023 में उनका नाम आवास सूची में भी शामिल हुआ था, लेकिन अचानक एक रिपोर्ट लगाई गई कि उनके पास खुद का मकान है। यह रिपोर्ट बिना किसी जांच-पड़ताल और बिना उनसे संपर्क किए तैयार कर दी गई।

हैरानी की बात यह है कि झूठी रिपोर्ट को आधार बनाकर उनका आवास रोक दिया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि सरवन गुप्ता आज भी किराए के मकान में परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं।

शिकायतों का फर्जी निस्तारण

रिक्शा चालक ने कई बार ऑनलाइन आवेदन भी किया, लेकिन हर बार औपचारिकता निभाकर उनकी शिकायत को “निस्तारित” दिखा दिया गया। इस रवैये से वे बेहद आहत हैं। उनका कहना है कि “शिकायत करने के लिए तो बहुत से माध्यम हैं, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं होती।”

बड़ी तस्वीर – योजना की जमीनी हकीकत

यह मामला केवल सरवन गुप्ता का नहीं है, बल्कि यह पूरे तंत्र की लापरवाही को उजागर करता है। केंद्र और राज्य सरकारें हर साल गरीबों के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं चलाती हैं, लेकिन फर्जी रिपोर्ट, भ्रष्टाचार और लापरवाह अधिकारियों की वजह से वास्तविक लाभार्थी छूट जाते हैं।
कानपुर जैसे बड़े शहरों में हजारों लोग अब भी किराए के मकानों या झुग्गियों में जिंदगी गुजार रहे हैं, जबकि कागजों पर कई “बेघरों” को पहले ही आवास मिल चुका दिखाया जाता है।

सरवन गुप्ता की अपील

सरवन गुप्ता ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और वास्तविक जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि वे किराए के मकान का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं और परिवार के साथ बेहद कठिन हालात में गुजर-बसर कर रहे हैं।

📍 पता: 127/617, जूही सफेद कॉलोनी, बारादेवी (नियर पश्चिम द्वार), थाना किदवई नगर, कानपुर नगर, यूपी – 208014



यह प्रकरण दिखाता है कि योजनाओं की सफलता सिर्फ घोषणा और लिस्ट बनाने से नहीं होती। जब तक जमीनी स्तर पर पारदर्शी जांच और ईमानदार क्रियान्वयन नहीं होगा, तब तक “सबका साथ, सबका विकास” का नारा अधूरा ही रहेगा।
सरवन गुप्ता जैसे गरीब रिक्शा चालक को न्याय दिलाना प्रशासन की जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की कसौटी भी है।

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