छत्तीसगढ़ से मेघा तिवारी की रिपोर्ट


रायपुर का यशवंत अस्पताल बना ‘पैसे का बाज़ार’, समय पर रेफर न मिलने से गई मासूम जान
रायपुर, 08 सितंबर 2025।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनहीनता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यशवंत अस्पताल में इलाज से ज़्यादा पैसों को महत्व दिए जाने के कारण एक मासूम ज़िंदगी थम गई।
1 सितंबर को नेहा छूरा नाम की युवती को कमर दर्द की शिकायत पर यशवंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार ने इलाज के दौरान करीब 3 लाख रुपये जमा कर दिए, लेकिन जब उसकी हालत गंभीर हुई और डॉक्टरों ने दूसरे अस्पताल में रेफर करने की सलाह दी, तब अस्पताल प्रबंधन ने एक ही शर्त रख दी —
💬 “पहले 40 हज़ार रुपये दीजिए, तभी मरीज को रेफर करेंगे।”
परिजनों ने हाथ जोड़कर कहा कि वे पैसा बाद में दे देंगे, फिलहाल मरीज को तुरंत रेफर किया जाए, लेकिन अस्पताल प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा। इसी बहस और पैसों के इंतज़ार में नेहा की जान चली गई।
परिजनों का आरोप
परिवार का कहना है कि अगर अस्पताल प्रबंधन ने संवेदनशीलता दिखाई होती और बिना देर किए मरीज को रेफर कर दिया होता, तो उनकी बेटी आज ज़िंदा होती। लेकिन अस्पताल की लालच और लापरवाही ने उनकी बेटी को उनसे छीन लिया।
जब इस पूरे मामले पर डॉ. सिद्धार्थ साहू से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन तक उठाना ज़रूरी नहीं समझा।
उठते बड़े सवाल
- क्या इंसान की ज़िंदगी से बढ़कर पैसा हो गया है?
- क्या अस्पताल अब सेवा का मंदिर न होकर पैसे वसूलने का बाज़ार बन चुके हैं?
- और सबसे अहम — इस अमानवीय लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है?
जांच की मांग
फिलहाल, परिजनों ने इस घटना की शिकायत सीएमएचओ से की है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। मामला सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश है और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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