NGV PRAKASH NEWS


संभाजीनगर,
18 सितंबर 2025
महाराष्ट्र के संभाजीनगर ज़िले में मंगलवार को एक ऐसी दर्दनाक घटना घटी, जिसने पूरे गांव को दहला दिया। पैठण तालुका के खादगांव में खेत का पंचनामा करने पहुंचे अधिकारियों के सामने ही किसान संजय शेषराव काकड़े (45) ने कुएं में छलांग लगाकर अपनी जान दे दी। इस घटना के बाद गांव में गहरा तनाव फैल गया और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
महाराष्ट्र में लगातार हो रही अतिवृष्टि और बाढ़ जैसी परिस्थितियों ने किसानों की हालत बद से बदतर कर दी है। खेत पानी में डूब गए, फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं और किसान भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इन्हीं हालातों ने किसानों को मानसिक तौर पर भी तोड़ दिया है।
खादगांव से खर्डा तक बन रही सड़क के काम के दौरान काकड़े के खेत के दोनों ओर गहरी खुदाई की गई थी। इससे खेत तक जाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया और बारिश का पानी भर जाने से उनकी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। बताया जाता है कि इस समस्या को लेकर काकड़े कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके थे, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
घटना वाले दिन जब अधिकारी पंचनामा करने पहुंचे तो काकड़े ने अपनी पीड़ा उन्हें बताई। आरोप है कि अधिकारियों ने उनकी व्यथा सुनने के बजाय उन्हें फटकार लगाई और कार्रवाई की चेतावनी दी। इससे आहत होकर वे अचानक पास के कुएं की ओर दौड़े और उसमें कूदकर आत्महत्या कर ली।
मृतक के भाई ने बताया कि दो दिन पहले ही उन्हें नोटिस मिला था कि उनके खेत की वजह से सड़क निर्माण का काम रुका है। अधिकारी पंचनामा करने आए तो उन्होंने भाई को डांटा। इसी अपमान से दुखी होकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया। वहीं, काकड़े की पत्नी ने भी अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उनके पति की मौत के लिए वही जिम्मेदार हैं, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने शव को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक काकड़े की मौत हो चुकी थी। घटना के बाद से गांव में गुस्से और शोक का माहौल है। किसान संगठनों ने इसे प्रशासन की लापरवाही का परिणाम बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक किसानों की व्यथा अनसुनी की जाती रहेगी और कब तक वे ऐसी मजबूरी में अपनी जान देने पर विवश होंगे।
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