एसएसपी की मां पड़ी बीमार :पुलिस इमरजेंसी से डॉक्टर को ही उठा लाई.

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इटावा में डॉक्टर और फार्मासिस्ट से अभद्रता, पुलिस पर गंभीर आरोप के बाद भड़के मेडिकल कर्मी

इटावा, 19 सितम्बर 2025।
उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद में बुधवार और गुरुवार की दरम्यानी रात एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं और कानून व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त चिकित्सालय की इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे डॉक्टर और फार्मासिस्ट को कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने जबरन गाड़ी में डालकर उठा ले गए। इस घटना से नाराज मेडिकल स्टाफ ने हड़ताल पर जाते हुए स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप कर दीं।

घटना कैसे घटी?

जानकारी के मुताबिक, इमरजेंसी में तैनात डॉ. राहुल बाबू और एक फार्मासिस्ट अपने काम में व्यस्त थे, तभी देर रात सिविल लाइन थाने के कुछ पुलिसकर्मी अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि वे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की बीमार मां को दिखाने के लिए डॉक्टर को तत्काल बुलाने लगे। जब डॉ. राहुल ने बताया कि इमरजेंसी नहीं छोड़ी जा सकती और अन्य स्टाफ भेजा जा सकता है, तो पुलिसकर्मी भड़क गए।

डॉ. राहुल का कहना है कि –
“तीन-चार पुलिसकर्मी आए, मेरा मोबाइल छीन लिया और गाली-गलौज करते हुए घसीटकर गाड़ी में डाल लिया। बार-बार समझाने के बावजूद वे नहीं माने और कहने लगे – ‘क्या तुम एसएसपी साहब से बड़े हो गए हो?’ यह हमारे सम्मान और पेशे पर सीधा हमला है।”

अस्पताल में उबाल

डॉक्टर और फार्मासिस्ट के साथ इस तरह की जबरदस्ती के बाद पूरा मेडिकल स्टाफ आक्रोशित हो गया। सभी ने हड़ताल का ऐलान कर दिया, जिसके चलते इमरजेंसी सहित अस्पताल की सेवाएं चरमरा गईं। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे। उनका यह भी आरोप है कि यह गुंडागर्दी की हद है और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो आगे किसी भी डॉक्टर की सुरक्षा की गारंटी नहीं रहेगी।

सीएमओ ने माना अपराध

इटावा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. बी.के. सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा –
“इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर और फार्मासिस्ट को जबरन उठाकर ले जाना न सिर्फ अभद्रता है, बल्कि सरकारी कार्य में बाधा डालना भी है। यह संगीन अपराध है और दोषियों पर कार्रवाई होगी। जनता की सेवा नहीं रुकनी चाहिए, इसलिए डॉक्टरों से हड़ताल न करने की अपील की गई है।”

सवालों के घेरे में पुलिस

यह घटना जहां पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है, वहीं डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर भी बहस छेड़ दी है। इमरजेंसी में जहां हर मिनट किसी मरीज की जान बचाने के लिए कीमती होता है, वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को खींचकर ले जाना कानून व्यवस्था की गंभीर चूक माना जा रहा है।

अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या डॉक्टरों का आक्रोश शांत हो पाता है या नहीं।

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