इंस्टाग्राम पर छायी इस “फन ट्रेड वाली कार्बाइड गन” नें छीन लीं 200 बच्चों की आंखें..

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दिवाली पर छाया मातम: इंस्टाग्राम के ‘फन ट्रेंड’ वाली कार्बाइड गन बनी काल, 200 से ज़्यादा बच्चे घायल, कई की आँखों की रोशनी स्थायी रूप से गई

दीपावली की खुशियों के बीच इस बार मध्य प्रदेश के कई घरों में मातम पसरा है। इसकी वजह है सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक जानलेवा “फन ट्रेंड” – देसी जुगाड़ से बनी ‘कार्बाइड गन’। PVC पाइप से बनी इस खतरनाक पटाखा गन ने पूरे प्रदेश में कहर बरपाया है, जिससे 200 से अधिक बच्चे गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। इन हादसों में कई बच्चों ने अपनी आँखों की रोशनी स्थायी रूप से खो दी है, जबकि कुछ के चेहरे बुरी तरह झुलस गए हैं।
सस्ते जुगाड़ ने छीनी जिंदगी की रोशनी
यह भयावह सिलसिला दीपावली से 15-20 दिन पहले तब शुरू हुआ, जब देश प्रदूषण और पारंपरिक पटाखों पर बहस में उलझा था। इसी दौरान, इंस्टाग्राम और यूट्यूब की रीलों में PVC पाइप से बनी इस गन को ‘कूल गैजेट’ और कुछ कंटेंट क्रिएटर्स द्वारा ‘ग्रीन पटाखा’ बताकर धड़ल्ले से प्रमोट किया गया।
ऐसे होता है विस्फोट: महज 150 से 200 रुपये में बिकने वाली यह ‘जुगाड़ गन’ PVC पाइप और कैल्शियम कार्बाइड से बनाई जाती है। इसमें पानी और कार्बाइड डालकर हिलाया जाता है, जिससे अत्यधिक ज्वलनशील ‘एसिटिलीन गैस’ बनती है। पाइप के सिरे पर लगे लाइटर से जैसे ही चिंगारी निकलती है, अंदर जमा गैस भयंकर विस्फोट के साथ फट जाती है।
200 से अधिक बच्चे अस्पतालों में, सर्जरी जारी
राजधानी भोपाल के अस्पतालों समेत विदिशा, ग्वालियर और इंदौर में बड़ी संख्या में बच्चों को आँख और चेहरे की गंभीर चोटों के साथ भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि यह क्षति सामान्य पटाखों से होने वाली चोटों से कहीं ज्यादा भयानक है।

  • गंभीरता: विस्फोट की ताकत से न सिर्फ केमिकल जलता है, बल्कि पाइप के टुकड़े (छर्रे की तरह) और तीव्र ताप आँखों के गोले और आसपास की त्वचा को गंभीर रूप से जला रहे हैं।
  • परिणाम: स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि कई मासूम बच्चों की आँखों की रोशनी स्थायी रूप से जा चुकी है।
    प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
    चौंकाने वाली बात यह है कि सोशल मीडिया पर यह ट्रेंड तेज़ी से फैलने और सड़क किनारे इसकी दुकानें लगने के बावजूद प्रशासन की नींद देर से टूटी। हादसे होने के बाद ही कार्रवाई शुरू की गई। घायल बच्चों के परिजनों ने मांग की है कि इस जानलेवा जुगाड़ को बनाने और बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए और बच्चों के इलाज का खर्च सरकार उठाए।
    जानकारों का मानना है कि यह घटना सस्ते और घरेलू जुगाड़ के रूप में फैले सोशल मीडिया ट्रेंड्स के खतरों की ओर इशारा करती है, जिस पर तत्काल नियंत्रण और व्यापक जागरूकता की आवश्यकता है।

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