⏩ बड़े हुए कास्ट की भरपाई उपभोक्ताओं से की जा रही है..


उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका, सीबीआई जांच की उठी मांग
लखनऊ, 26 अक्टूबर 2025।
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की परियोजना अब गंभीर विवादों में घिर गई है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने इस योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इसकी सीबीआई या ईडी जांच की मांग की है।
वर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत उत्तर प्रदेश को स्मार्ट प्रीपेड मीटर परियोजना के लिए ₹18,885 करोड़ की स्वीकृति दी गई थी। लेकिन उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन (UPPCL) द्वारा जारी टेंडर ₹27,342 करोड़ की ऊँची दर पर निजी कंपनियों को अवार्ड किए गए। इस प्रकार लगभग ₹8,500 करोड़ की अतिरिक्त राशि का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल दिया गया।
उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त लागत को छिपाने के लिए यूपी पावर कॉरपोरेशन उपभोक्ताओं से “गलत तरीके” से चार्ज वसूल रहा है। 10 सितंबर से अब तक 20,243 स्मार्ट प्रीपेड मीटर आधारित कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से 12,944 घरेलू सिंगल फेस कनेक्शन हैं। इनमें गरीब उपभोक्ता (1 किलोवाट क्षमता वाले) लगभग 4000 हैं। परिषद द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, औसतन ₹6,016 की दर से उपभोक्ताओं से सिर्फ एक महीने में ₹13.20 करोड़ की वसूली की गई है।
वर्मा ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला “सिस्टमेटिक फाइनेंशियल मैनिपुलेशन” यानी सुनियोजित वित्तीय गड़बड़ी का संकेत देता है। उन्होंने कहा,
“यदि इस योजना की जांच सीबीआई या ईडी से कराई गई, तो कई बड़े नाम सामने आएंगे।”
उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए बताया कि वहाँ ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव को स्मार्ट मीटर खरीद में अनियमितताओं के कारण जेल जाना पड़ा था। ईडी की जांच में यह सामने आया था कि एक मीटर निर्माता कंपनी ने उन्हें मर्सिडीज बेंज कार रिश्वत में दी थी।
वर्मा ने पावर कॉरपोरेशन की सफाई पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि कॉरपोरेशन यह कहकर बचाव कर रहा है कि “कॉस्ट डाटा बुक 2019 के बाद अनुमोदित नहीं हुई”, जबकि सच्चाई यह है कि खुद पावर कॉरपोरेशन बार-बार गलत दरों का प्रस्ताव भेजता रहा और जब परिषद ने आपत्ति की, तो संबंधित अधिकारी जवाब देने से बचते रहे।
उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि —
- हरियाणा में स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को 5% की छूट दी जाती है,
- उत्तर प्रदेश में केवल 2%,
- महाराष्ट्र में सिंगल फेज स्मार्ट मीटर की लागत ₹2610,
- जबकि उत्तर प्रदेश में ₹6016 तक वसूला जा रहा है,
- वहीं राजस्थान में यही मीटर केवल ₹2500 में लगाया जा रहा है।
वर्मा ने कहा कि यह स्पष्ट है कि योजना का मकसद उपभोक्ताओं को सुविधा देना नहीं, बल्कि “चुनिंदा कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाना” है।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ऊर्जा मंत्री से मांग की कि स्मार्ट मीटर योजना की पूरी प्रक्रिया की सीबीआई या ईडी जांच कराई जाए, ताकि जनता के पैसों से हो रहे इस कथित घोटाले का पर्दाफाश हो सके।
— NGV PRAKASH NEWS




👉 स्रोत.. सोशल मीडिया
