बिहार में सत्ता की बाजी किसके हाथ- अब बस कुछ घंटों का इंतजार..

👉NGV PRAKASH NEWS की विशेष रिपोर्ट….

⏩ क्या सच होंगे एग्जिट पोल…

⏩ एनडीए फिर बनाएगी सरकार या बाजी लगेगी महागठबंधन के हाथ…

⏩ इसके पहले भी एग्जिट हो पोल हो चुके हैं फेल

“यही रात आखिरी… बिहार में सत्ता की बाज़ी, अब बस कुछ घंटों का इंतज़ार”
पटना। 14 नवंबर 2025।

बिहार की राजनीति की सबसे बड़ी परीक्षा का वक्त आ गया है। 14 नवंबर की सुबह जैसे-जैसे करीब आ रही है, पूरे राज्य का माहौल चुनावी सरगर्मी और सियासी बेचैनी से भरा हुआ है। यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि बिहार की जनता की उम्मीदों, नाराज़गी और भविष्य की दिशा तय करने का भी चुनाव साबित होने जा रहा है।

इस बार बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों पर हुए मतदान में 66.9% से अधिक मतदाताओं ने वोट डाला, जो पिछले कई दशकों का रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ा है। महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों से अधिक रही, जिससे यह संकेत मिला कि इस बार बिहार की राजनीति में “महिला शक्ति” निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

राज्य में एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है। ज्यादातर एग्जिट पोल्स ने एनडीए को बढ़त दी है, लेकिन महागठबंधन का दावा है कि ज़मीनी हकीकत एग्जिट पोल्स से अलग है। एनडीए “डबल इंजन सरकार” के नारे के साथ मैदान में उतरा, जबकि महागठबंधन ने बेरोज़गारी, शिक्षा और भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा बनाया।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस चुनाव का रुझान सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच की टक्कर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह तय करेगा कि बिहार के मतदाता विकास, स्थिरता या बदलाव में से किस रास्ते को चुनते हैं। युवा मतदाताओं के लिए यह चुनाव नौकरी और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक है, वहीं ग्रामीण इलाकों में किसान और मजदूर वर्ग इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, अगर एनडीए को बहुमत मिलता है तो यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिहार में उनकी पुनः स्वीकार्यता का संकेत होगा। वहीं अगर महागठबंधन या तीसरी शक्ति (जैसे प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज पार्टी’) बेहतर प्रदर्शन करती है, तो बिहार की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

वोटों की गिनती कल सुबह से शुरू होगी और दोपहर तक तस्वीर साफ़ होने की उम्मीद है। नतीजों के साथ ही यह भी तय हो जाएगा कि क्या बिहार में सत्ता का चेहरा बदलेगा या फिर पुरानी व्यवस्था को जनता ने एक और मौका दिया है।

एक तरफ सत्ता की कुर्सी पर फिर से कब्ज़ा जमाने की होड़ है, तो दूसरी ओर जनता उम्मीदों की गठरी बांधे बैठी है — यही रात आखिरी है, क्योंकि 14 नवंबर की सुबह बिहार की राजनीति का नया अध्याय लिखने वाली है।

NGV PRAKASH NEWS

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