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उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के दो बड़े खुलासे—उपर निरीक्षक और सहायक/एमटीएस स्वैच्छिक रिश्वत लेते गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश। 13 नवंबर 2025।
प्रदेश में भ्रष्टाचार-रोधी अभियानों को नई गति मिली है, क्योंकि दो विभिन्न जनपदों में सरकारी कर्मियों को रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया गया है। पहली घटना जनपद अमेठी की है, जहाँ एक उप निरीक्षक को ₹30,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया है। दूसरी घटना जनपद अमरोहा में सामने आई है, जहाँ सहायक/एमटीएस स्तर के कर्मचारी से ₹20,000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुआ है।
पहला मामला (अमेठी):
सूत्रों के अनुसार, उप निरीक्षक को राज्यस्तरीय भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी द्वारा जाल बिछाकर पकड़ा गया। उस पर आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता से फाइनल रिपोर्ट दर्ज कराने, नाम हटाने या प्रकरण को सुलझाने के नाम पर 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी और ले ली थी। गिरफ्तारी के बाद मामला विभागीय जांच के दायरे में आ गया है।
दूसरा मामला (अमरोहा):
मुरादाबाद इकाई का एंटी-करप्शन दल जब्त साक्ष्यों के साथ अभियान में उतरा। उसने अमरोहा जिले के एक सहायक/एमटीएस को किसानों के नाम से जमीन-रजिस्ट्री आदि कार्य पूरा करने के बदले 20 हजार रुपये लेते हुए धरदबोचा। शिकायतकर्ता के विवरण के आधार पर यह कार्रवाई संभव हुई।
प्रभाव और आगे की कार्रवाई:
इन दोनों घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि सरकारी तंत्र में रिश्वती भ्रष्टाचार पर शासन-प्रशासन द्वारा “शून्य सहनशीलता” की नीति पर पुनः जोर दिया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि रिश्वत-मांग या लेने वाले किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
इस संबंध में विभाग ने नागरिकों के लिए विशेष हेल्पलाइन भी जारी की है:
📱 9454402484 ✉️ aco@nic.in
यदि किसी भारतीय नागरिक को सरकारी कर्मियों द्वारा रिश्वत मांगते या लेते देखते हुए हो, तो वह इन माध्यमों से जानकारी तुरंत दे सकता है।
इन अभियानों के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में अधीनस्थ स्तर पर चल रही रिश्वत-मांग की प्रवृत्ति पर तलवार चलाई जाएगी, और सरकारी सेवावर्ग में पारदर्शिता व जवाबदेही बढ़ेगी।
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