

अयोध्या: राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज का ऐतिहासिक आरोहण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले—“आज पूरी दुनिया राममय”
अयोध्या, 25 नवंबर 2025
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के 673 दिन बाद अयोध्या ने एक और ऐतिहासिक क्षण देखा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के मुख्य शिखर पर धर्मध्वज का विधिवत आरोहण किया। 161 फीट ऊंचे शिखर पर केसरिया ध्वज के लहराते ही पूरे परिसर में भक्ति, उल्लास और भावनाओं का अद्भुत संगम दिखाई दिया। प्रधानमंत्री मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, संत समाज और हजारों श्रद्धालुओं की आंखें इस क्षण को देखकर भावुक हो उठीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “आज सदियों के घाव भर गए हैं, पूरी दुनिया राममय हो गई है। राम विनम्रता में महाबल का प्रतीक हैं। हमें अपनी जड़ों से जुड़कर आगे बढ़ना है और गुलामी की मानसिकता से मुक्त होना है।” उन्होंने भारतीय परंपरा, विरासत और सांस्कृतिक अस्मिता के जागरण को राष्ट्र के लिए नई ऊर्जा बताया।
यह दिन 9 नवंबर 2019, 5 अगस्त 2020 और 22 जनवरी 2024 की ऐतिहासिक तिथियों की श्रंखला में जुड़कर सनातन परंपरा के स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया। धर्मध्वज की प्रतिष्ठा को मंदिर की पूर्णता की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कारीगरों और श्रमवीरों को किया नमन
प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर निर्माण में लगे कारीगरों, वास्तुकारों और श्रमवीरों को प्रणाम करते हुए कहा कि अयोध्या की यह धरती बताती है कि कैसे एक राजकुमार मर्यादा पुरुषोत्तम बनता है। उन्होंने शबरी, केवट, निषादराज, अहिल्या, वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, जटायु और गिलहरी की भूमिका को भारतीय संस्कृति के प्रेरक स्रोत के रूप में रेखांकित किया।
संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले—आस्था का संघर्ष आज साकार
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि “आज करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था साकार हुई है। इस मंदिर के लिए 500 वर्षों का संघर्ष आज फलीभूत हुआ। जैसा सपना था, उससे भी अधिक भव्य मंदिर बना है।” उन्होंने कहा कि धर्मध्वज की तरह सनातन की ध्वजा को भी शिखर तक ले जाना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “आज पीढ़ियों का इंतजार पूरा हुआ है। राम मंदिर करोड़ों भावनाओं का प्रतीक है और देश नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है।”
ध्वजारोहण से पहले विशेष पूजा-अर्चना
ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने माता अन्नपूर्णा मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद प्रधानमंत्री ने सप्तमंदिर परिसर में पहुंचकर वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी से जुड़े मंदिरों में दर्शन किए।
मंदिर की वास्तुशिल्पीय भव्यता
राम मंदिर का 161 फीट ऊंचा मुख्य शिखर उत्तर भारतीय नागर शैली में निर्मित है, जबकि इसके चारों ओर 800 मीटर का परकोटा दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली को प्रदर्शित करता है। मुख्य मंदिर के छह पूरक मंदिर भी इसी परकोटे में निर्मित हैं, जो इसकी वास्तु विविधता को दर्शाते हैं।
अयोध्या में रोड शो और सांस्कृतिक भव्यता
ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री मोदी का एक किलोमीटर लंबा रोड शो हुआ, जिसमें 12 स्थानों पर स्वागत मंच तैयार किए गए थे। लोक कलाकारों ने नृत्य, भजन और गीतों के माध्यम से अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया। सड़कों पर जय श्रीराम के नारों के बीच भारी भीड़ प्रधानमंत्री का स्वागत करती दिखाई दी।
ध्वजारोहण के समय होगा मंगल-स्वस्ति गान
कार्यक्रम के दौरान भव्य मंगल-स्वस्ति गान प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें प्रतिष्ठित कलाकार आचार्य रामचरितमानस के प्रसंग, स्तोत्र और विविध संतों की रचनाएं सामूहिक रूप से प्रस्तुत करेंगे। यह आयोजन अयोध्या की सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक परंपरा को उजागर करेगा।
22 महीने बाद रामलला के समक्ष प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी लगभग 22 महीने बाद रामलला के समक्ष पहुंचे। उन्होंने 5 अगस्त 2020 को मंदिर की आधारशिला रखी थी और 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा की थी। उनका यह दौरा मंदिर निर्माण के निर्णायक चरण की पूर्णता के रूप में देखा जा रहा है।
अयोध्या आज ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महिमा के चरम पर दिखाई दी—एक ऐसा दिन जिसे आने वाली पीढ़ियाँ याद रखेंगी।
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