मैंनेजबल बीमारी है एड्स – जागरूकता ही बचाव का उत्तम साधन..

👉 विश्व एड्स दिवस पर विशेष….

विश्व एड्स दिवस 2025: जागरूकता, संवेदना और सुरक्षित जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम |

01 दिसंबर 2025 | NGV PRAKASH NEWS

हर साल 01 दिसंबर को विश्व एचआईवी/एड्स दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य सिर्फ एक बीमारी को याद करना नहीं, बल्कि उससे जुड़े सामाजिक मायनों, मानवीय संवेदनाओं और जागरूकता को नई दिशा देना है। एचआईवी/एड्स तीन दशकों से अधिक समय से दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण स्वास्थ्य समस्याओं में से एक रहा है, लेकिन बीते वर्षों में विज्ञान, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सोच में आए बदलावों ने इसे ‘मौत का पर्याय’ होने से काफी हद तक अलग कर दिया है। आज यह एक मैनेजेबल बीमारी है, बशर्ते समय पर जांच, सही इलाज और निरंतर दवा का पालन किया जाए।

एचआईवी/एड्स पर बदल रही दुनिया की सोच
कभी एचआईवी को लेकर समाज में भय और भ्रम इतना अधिक था कि संक्रमित व्यक्ति को समाज से बाहर कर दिया जाता था। लेकिन अब स्पष्ट है कि एचआईवी केवल एक वायरस है, कोई सामाजिक अपराध नहीं। इसे छूने, साथ बैठने, खाना खाने या सामान्य संपर्क से नहीं फैलता। यह केवल असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त, असुरक्षित सुई या प्रसव के दौरान मां से बच्चे में स्थानांतरित हो सकता है। जागरूकता बढ़ने से आज लोग बीमारी से लड़ने के लिए अधिक तैयार और वैज्ञानिक रूप से सजग हैं।

समय पर जांच और इलाज की सबसे बड़ी भूमिका
विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि एचआईवी की रोकथाम का सबसे महत्वपूर्ण कदम है — समय पर जांच। आज देश में सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निःशुल्क एचआईवी टेस्ट, एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) और परामर्श सेवाएं उपलब्ध हैं।
ART दवा का नियमित सेवन वायरस को नियंत्रित रखता है, जिससे संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है और वायरस का प्रसार भी रुक जाता है।

युवाओं में जागरूकता जरूरी
भारत में एचआईवी संक्रमण का सबसे बड़ा खतरा युवाओं में जागरूकता की कमी है। आधुनिक संचार माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बावजूद सुरक्षित यौन संबंध, नियमित जांच और विश्वसनीय जानकारी जैसी बातें अभी भी खुले में चर्चा नहीं बन पातीं। यही कारण है कि जागरूकता अभियान, स्कूल–कॉलेजों में स्वास्थ्य शिक्षा और सोशल मीडिया पर पुख्ता जानकारी बेहद जरूरी है।

भ्रम नहीं, संवेदना और समझ की आवश्यकता
एचआईवी से लड़ाई केवल दवाओं से नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समर्थन और इंसानियत से भी होती है। संक्रमित व्यक्ति के प्रति भेदभाव न सिर्फ गलत है, बल्कि उपचार में बाधा भी बनता है। समाज तभी सुरक्षित रह सकता है, जब हम बीमारी को नहीं, बल्कि भ्रम और कलंक को खत्म करें।

विश्व एड्स दिवस का संदेश
इस वर्ष विश्व एड्स दिवस का संदेश साफ है—
जांच कराएं, सुरक्षित रहें। प्यार और सम्मान के साथ जागरूकता फैलाएं।
यदि समाज खुलकर इस विषय पर चर्चा करेगा, असुरक्षित आदतों को बदलने का साहस दिखाएगा और जरूरतमंदों को सहयोग देगा, तभी हम एचआईवी/एड्स मुक्त समाज की दिशा में कदम बढ़ा सकेंगे।

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