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अयोध्या में लाल पैथ लैब में बड़ा खुलासा: एसपी ग्रामीण को गलत शुगर रिपोर्ट, दो घंटे में बदली रिपोर्ट — स्वास्थ्य विभाग ने लैब सील की |
01 दिसंबर 2025 | NGV PRAKASH NEWS
अयोध्या।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रिकाबगंज स्थित लाल पैथ लैब, जो शहर की प्रतिष्ठित और भरोसेमंद जांच इकाइयों में गिनी जाती थी, गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं के चलते सील कर दी गई है। मामला तब उजागर हुआ जब एसपी ग्रामीण बलवंत चौधरी को इसी लैब से गलत HBA1C रिपोर्ट जारी की गई। प्रतिकूल परिणाम देखकर जब उन्होंने इसे अपने चिकित्सक को दिखाया, तो डॉक्टर ने तुरंत रिपोर्ट पर संदेह जताया। दो घंटे बाद दोबारा जांच कराने पर दूसरी रिपोर्ट पूरी तरह अलग मिली, जिसके बाद पूरे प्रकरण की हकीकत सामने आ गई।
शुगर हिस्ट्री जैसी महत्वपूर्ण जांच में ऐसा बड़ा अंतर स्वास्थ्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को मिली गलत रिपोर्ट से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम मरीजों को किस स्तर की लापरवाही का सामना करना पड़ रहा होगा।
जांच टीम ने खोली अनियमितताओं की परतें
एसपी ग्रामीण ने तत्काल इस मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. सुशील कुमार बानियान को दी। शिकायत मिलते ही सीएमओ ने नोडल अधिकारी डॉ. राजेश चौधरी की टीम को लैब की जांच के लिए भेजा।
जांच में सामने आए तथ्य चौंकाने वाले थे—
- लैब में कुल पांच कर्मचारी कार्यरत मिले, जिनमें सिर्फ एक ही अधिकृत निकला।
- चार कर्मचारी बिना किसी योग्यता, प्रमाणपत्र और मान्यता के पैथोलॉजी कार्य कर रहे थे।
- रिकॉर्ड और रिपोर्ट डेटा में गंभीर विसंगतियां पाई गईं।
- मशीनों की मेंटेनेंस और कैलिब्रेशन का कोई वैध रिकॉर्ड नहीं मिला।
इन अनियमितताओं को देखते हुए जांच टीम ने मौके पर ही लैब को सील करने की कार्रवाई की।
सीएमओ की सख्त चेतावनी
CMO डॉ. सुशील कुमार बानियान ने कहा कि लैब में गंभीर गड़बड़ियां उजागर हुई हैं। जांच पूरी होने तक सील में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न की जाए। संचालक डॉ. हरिओम गुप्ता को सख्त चेतावनी जारी कर दी गई है।
जनता में चिंता और आक्रोश
लाल पैथ लैब शहर की भरोसेमंद लैब्स में गिनी जाती थी, जहां रोज बड़ी संख्या में मरीज विभिन्न जांचें करवाते थे। लेकिन इस खुलासे के बाद आम लोगों के मन में निजी लैब्स की विश्वसनीयता को लेकर गहरी चिंता उत्पन्न हो गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गलत जांच रिपोर्ट—
- मरीज के उपचार को गलत दिशा में ले जा सकती है,
- दवाइयां गलत पड़ सकती हैं,
- और गंभीर मामलों में मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है।
शहर में इस घटना को लेकर आक्रोश व्याप्त है। लोग कह रहे हैं कि जब एक बड़ी, स्थापित और ‘प्रतिष्ठित’ लैब में ऐसी लापरवाही हो सकती है, तो छोटी या अनियमित लैब्स में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई होगी और अन्य लैब्स की भी विशेष जांच कराई जाएगी, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
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