👉 पसलियां टूटकर फेफड़ों में घुस गई…


आगरा में दर्दनाक सड़क हादसा: एमबीबीएस छात्रों की मौत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले कई राज, परिवार में कोहराम
आगरा, 02 दिसंबर 2025।
आगरा में हुए भीषण सड़क हादसे में एसएन मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस तृतीय वर्ष के छात्र सिद्ध गर्ग और उनके सहपाठी तनिष्क गुप्ता की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि दोनों छात्रों की मौत पसलियों के टूटकर फेफड़ों में घुसने से हुई, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। दोनों के शरीर पर गहरे घाव और कई जगह चोटों के निशान पाए गए।
हरीपर्वत थाना प्रभारी के अनुसार, तनिष्क और सिद्ध के शरीर पर पांच जगह गंभीर चोटें थीं। तनिष्क के माथे के बीच में गहरी चोट थी, जबकि ठोड़ी और घुटनों पर सड़क पर घिसटने से लगे घाव मिले। उसकी छाती की बाईं तरफ की कई पसलियां टूटकर फेफड़ों में धंस गईं। सिद्ध की पसलियों में भी कई जगह फ्रैक्चर पाया गया और ठोड़ी व घुटनों पर चोट के निशान थे। अधिकारियों के मुताबिक मौत का कारण अत्यधिक खून बहना था।
घटना रविवार शाम आईएसबीटी के निकट तब हुई जब दोनों छात्र बाइक पर सवार होकर लौट रहे थे। अचानक डिवाइडर से टकराने पर दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। सहपाठियों के पहुंचने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। परिवार की मांग पर देर रात पोस्टमार्टम कराया गया।
इस हादसे पर सिद्ध के पिता राजेश अग्रवाल ने पुलिस पर देर से पहुंचने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि अगर समय रहते इलाज मिल जाता तो दोनों की जान बच सकती थी। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि सूचना मिलने के पांच मिनट बाद ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। इस पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है।
देर रात डेढ़ बजे जब सिद्ध का शव घर पहुंचा, तो मां नीरू गर्ग अपने बेटे को देख बेहोश होकर गिर पड़ीं। होश में आने पर वे बेटे को गले लगाकर बार-बार उसे उठने के लिए पुकारने लगीं। पूरी कॉलोनी में मातम पसरा हुआ था। सुबह किसी घर में चूल्हा तक नहीं जला। सिद्ध के पढ़ाई और स्वभाव की चर्चा हर किसी की जुबान पर थी। सोमवार को अंतिम यात्रा के दौरान माहौल गमगीन हो गया। छोटे भाई अक्षत गर्ग के हाथ बड़े भाई को मुखाग्नि देते वक्त कांपने लगे।
परिवार के लिए यह हादसा असहनीय इसलिए भी है क्योंकि सिद्ध पूरे खानदान में पहला डॉक्टर बनने जा रहा था। पिता राजेश अग्रवाल ने बताया कि 10वीं और 12वीं में उसने 95 प्रतिशत अंक लाए थे। पहली कोशिश में नीट क्वालीफाई करने पर वैश्य समाज ने उनका सम्मान किया था। उसे सरकारी सीट मिली थी और परिवार में हर कोई उसे प्यार से “डॉक्टर साहब” कहकर बुलाता था। पिता ने कहा कि बेटे का जाना ऐसा घाव है जो जिंदगी भर भरेगा नहीं।
यह हादसा न सिर्फ एक परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए गहरा आघात छोड़ गया है। दो होनहार छात्रों की असमय मौत सड़क सुरक्षा के सवालों को एक बार फिर खड़ा कर गई है।
NGV PRAKASH NEWS




