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पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में बड़ा खुलासा, SIR जांच में लाखों एंट्री पर सवाल
दिसंबर 13, 2025।
पश्चिम बंगाल में चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष सघन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन – SIR) अभियान के दौरान ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जिन्होंने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव आयोग के आंतरिक विश्लेषण में लाखों मतदाताओं के पारिवारिक विवरण में भारी गड़बड़ियां पाई गई हैं, जो सामान्य टाइपिंग त्रुटि से कहीं आगे की समस्या की ओर इशारा करती हैं।
SIR के तहत वर्ष 2002 की मतदाता सूची की जांच में सामने आया है कि करीब 85 लाख मतदाताओं के पिता के नाम में गलतियां दर्ज हैं। इनमें कहीं नाम अधूरे पाए गए हैं, कहीं पूरी तरह गलत दर्ज हैं, तो कई मामलों में पिता का नाम पारिवारिक संबंधों से मेल ही नहीं खाता। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में एक जैसी त्रुटियां किसी तकनीकी चूक के साथ-साथ बड़े स्तर पर डेटा की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती हैं।
सबसे हैरान करने वाला तथ्य यह सामने आया है कि लगभग 13.5 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में मां और पिता का नाम एक ही व्यक्ति का दर्ज है। यानी एक ही नाम को पिता और माता दोनों कॉलम में दर्ज कर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति सामान्य परिस्थितियों में असंभव है और यह या तो डेटा माइग्रेशन के दौरान हुई गंभीर गलती हो सकती है या फिर जानबूझकर की गई गलत एंट्री की आशंका को भी खारिज नहीं किया जा सकता।
SIR अभियान में उम्र से जुड़ी विसंगतियां भी बड़े पैमाने पर सामने आई हैं। जांच में 11,95,230 ऐसे मामले मिले हैं, जहां पिता की उम्र बेटे से केवल 15 साल या उससे भी कम अधिक दर्ज है। सामाजिक और जैविक दृष्टि से यह लगभग असंभव माना जाता है। इसी तरह 24,21,133 मामलों में एक ही व्यक्ति के छह या उससे अधिक बच्चे दर्ज पाए गए हैं, जो सामान्य पारिवारिक संरचना से अलग और असामान्य माने जा रहे हैं।
डेटा विश्लेषण में एक और चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि 3,29,152 मतदाताओं के रिकॉर्ड में दादा की उम्र पोते से 40 साल से भी कम अधिक दर्ज है। यह स्थिति भी पीढ़ीगत संबंधों में गंभीर त्रुटियों की ओर इशारा करती है और मतदाता सूची के निर्माण व अद्यतन प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है।
चुनाव आयोग द्वारा चलाया जा रहा SIR अभियान मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने की एक विशेष प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वोटर लिस्ट में केवल पात्र मतदाताओं के ही नाम दर्ज हों और मृत, फर्जी या एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को हटाया जा सके। इसके तहत घर-घर जाकर सत्यापन, दस्तावेजों की जांच और डेटा विश्लेषण के जरिए मतदाता सूची की गहन समीक्षा की जाती है।
चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि SIR का मकसद मतदाता सूची की विश्वसनीयता बढ़ाना है, ताकि चुनावी प्रक्रिया पर किसी भी तरह का संदेह न रहे। पश्चिम बंगाल में सामने आए ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि बीते वर्षों में मतदाता सूची के अद्यतन में गंभीर चूक हुई है, जिसे दुरुस्त करना अब आयोग की प्राथमिकता बन गया है।
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