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चिकन और पालक खाने के बाद एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत, फूड पॉइजनिंग की आशंका
ढेंकानाल (ओडिशा), 24 दिसंबर 2025।
ओडिशा के ढेंकानाल जिले के इटाप गांव में संदिग्ध फूड पॉइजनिंग का मामला सामने आया है, जहां चिकन करी और पालक खाने के बाद एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। भोजन करने के कुछ समय बाद तीनों की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण फूड पॉइजनिंग माना जा रहा है, हालांकि प्रशासन की ओर से मामले की जांच की जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अगर यह मामला वास्तव में फूड पॉइजनिंग का है तो यह एक बार फिर इस गंभीर लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली समस्या की ओर ध्यान खींचता है। चिकन और पालक दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन यदि इन्हें सही तरीके से साफ, पकाया और सुरक्षित तरीके से संग्रहित न किया जाए तो यही भोजन जानलेवा भी बन सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि कच्चा या अधपका चिकन साल्मोनेला, कैंपिलोबैक्टर और क्लॉस्ट्रिडियम परफ्रिंजेंस जैसे खतरनाक बैक्टीरिया का स्रोत हो सकता है। यदि चिकन पूरी तरह नहीं पकाया गया हो या कच्चे चिकन के संपर्क में आए चाकू, कटिंग बोर्ड या हाथों से दूसरी खाद्य सामग्री तैयार की जाए तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है। बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में यह संक्रमण जल्दी गंभीर रूप ले सकता है और सेप्सिस या अंगों के फेल होने जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।
पालक और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों में भी ई.कोलाई, लिस्टेरिया और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया पाए जा सकते हैं। ये सब्जियां अक्सर कच्ची या हल्की पकी खाई जाती हैं, इसलिए यदि इनमें गंदा पानी, मिट्टी या गलत स्टोरेज के कारण बैक्टीरिया मौजूद हों तो वे नष्ट नहीं हो पाते। सिर्फ पानी से धोना कई बार इन सूक्ष्म जीवों को पूरी तरह खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं होता।
विशेषज्ञ बताते हैं कि सबसे बड़ा खतरा क्रॉस-कंटैमिनेशन से होता है, जब कच्चे चिकन को काटने के बाद उसी चाकू या बोर्ड पर सब्जियां काटी जाती हैं या उसी जगह धोई जाती हैं। इसके अलावा पका हुआ खाना लंबे समय तक बाहर रखना या सही तापमान पर न रखना भी बैक्टीरिया के तेजी से बढ़ने का कारण बनता है।
डॉक्टरों के अनुसार फूड पॉइजनिंग के लक्षण शुरुआत में हल्के लग सकते हैं, लेकिन समय पर इलाज न होने पर यह डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, शॉक और खून में संक्रमण जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकता है। कैंसर, डायबिटीज, लिवर रोग से पीड़ित मरीज और कीमोथेरेपी लेने वाले लोग विशेष रूप से ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि भोजन की सुरक्षा को लेकर सावधानी बेहद जरूरी है। साफ-सफाई, सही तापमान पर पकाना और सुरक्षित भंडारण जैसी आदतें अपनाकर ऐसी टाली जा सकने वाली घटनाओं से बचा जा सकता है।
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