कानपुर हैलेट अस्पताल का कारनामा, जिंदा मरीज को मरा बता पोस्ट मार्टम के लिये सूचित किया…

NGV PRAKASH NEWS


हैलेट अस्पताल में बड़ी लापरवाही, जिंदा मरीज को मृत घोषित कर भेज दी पुलिस सूचना

कानपुर, 28 दिसंबर 2025। उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित हैलेट अस्पताल में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जहां जूनियर डॉक्टरों की लापरवाही के चलते एक जीवित मरीज को मृत घोषित कर दिया गया और उसका पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस को सूचना तक भेज दी गई। मामला तब उजागर हुआ जब स्वरूप नगर थाने की पुलिस शव लेने अस्पताल पहुंची और पाया कि मरीज जीवित है और सांस ले रहा है।

जानकारी के अनुसार यह घटना अस्पताल के वार्ड नंबर 12 की है, जहां एक गंभीर हालत वाले मरीज को भर्ती कराया गया था। यह मरीज कथित रूप से सीनियर डॉक्टर ब्रजेश कुमार की देखरेख में इलाजरत था। बताया गया कि जूनियर डॉक्टरों ने बिना पूरी जांच-पड़ताल किए, बिना पल्स, सांस और अन्य जरूरी मेडिकल पैरामीटर्स की पुष्टि किए ही मरीज को मृत घोषित कर दिया और इसके आधार पर पुलिस इन्फॉर्मेशन स्वरूप नगर थाने भेज दी गई।

पुलिस जब पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए शव लेने इमरजेंसी वार्ड पहुंची, तो वहां मौजूद स्टाफ और पुलिसकर्मी हैरान रह गए क्योंकि मरीज बेड पर जीवित अवस्था में था और उसकी छाती चल रही थी। तुरंत अस्पताल प्रशासन को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद पूरे वार्ड में अफरा-तफरी मच गई।

घटना सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ डॉक्टरों और प्रबंधन ने तत्काल मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है और उसे विशेष निगरानी में रखा गया है।

बताया गया है कि यह मरीज गोविंद नगर पुलिस द्वारा अज्ञात नाम और पते के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस घटना के बाद अन्य मरीजों के परिजनों में भारी आक्रोश है। परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पहले से ही लापरवाही और अव्यवस्था की शिकायतें आम हैं, लेकिन इस स्तर की चूक बेहद खतरनाक और अस्वीकार्य है। परिजनों ने दोषी जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है। स्वरूप नगर थाने की पुलिस का कहना है कि पुलिस इन्फॉर्मेशन मिलने के बाद टीम अस्पताल पहुंची थी, लेकिन मरीज के जीवित होने की पुष्टि होते ही अस्पताल प्रशासन को सूचित किया गया। मामले की जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले की जांच मेडिकल कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल डॉ ऋचा गिरी को सौंपी गई है। साथ ही अस्पताल के सुपरिटेंडेंट इंचार्ज डॉ आरके सिंह ने भी संबंधित विभाग का निरीक्षण किया है। अस्पताल प्रबंधन ने माना है कि यह गंभीर लापरवाही का मामला है। एक जांच कमेटी गठित कर दी गई है, जो अगले 48 घंटे में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर दोषी जूनियर डॉक्टर या अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, डॉक्टरों की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जूनियर डॉक्टरों को बेहतर प्रशिक्षण और सीनियर सुपरविजन की जरूरत है ताकि इस तरह की जानलेवा गलतियां दोबारा न हों।

NGV PRAKASH NEWS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *