क्या टल सकता है उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव…….

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👉 समय से होंगे पंचायत चुनाव- ओमप्रकाश राजभर


लखनऊ, 08 जनवरी 2026
उत्तर प्रदेश में इसी साल अप्रैल–मई में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर असमंजस की स्थिति बनती नजर आ रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक राज्य में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन नहीं हो सका है, जिसके बिना पंचायतों में ओबीसी आरक्षण तय करना संभव नहीं है। इसी कारण चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी हो पाएगी या नहीं, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं।

पंचायतीराज विभाग ने छह सदस्यीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है, लेकिन अब तक इस पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। जब तक आयोग गठित नहीं होता और अपनी रिपोर्ट नहीं देता, तब तक पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण का खाका तैयार नहीं किया जा सकता।

जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अनुसूचित जातियों की आबादी 20.6982 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों की आबादी 0.5677 प्रतिशत है। पंचायत चुनाव में इन दोनों वर्गों के लिए सीटों का आरक्षण इन्हीं अनुपातों के आधार पर तय होता है। लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी के लिए स्थिति अलग है, क्योंकि जनगणना में ओबीसी का अलग से आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

राज्य सरकार ने 2015 में कराए गए रैपिड सर्वे के आधार पर ओबीसी की ग्रामीण आबादी 53.33 प्रतिशत मानी थी और 2021 के पंचायत चुनाव में इसी सर्वे के आधार पर आरक्षण तय किया गया था। हालांकि नियम यह भी है कि किसी भी ब्लॉक में ग्राम प्रधान पदों का ओबीसी आरक्षण 27 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता, भले ही वहां ओबीसी आबादी इससे ज्यादा क्यों न हो। यदि किसी क्षेत्र में ओबीसी आबादी 27 प्रतिशत से कम है, तो उसी अनुपात में पद आरक्षित किए जाते हैं। प्रदेश स्तर पर ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य माना जाता है।

इससे पहले नगर निकाय चुनावों में ओबीसी आबादी को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, जिसके बाद सरकार ने नगर निकायों के लिए अलग से समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनाकर सर्वे कराया था और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण तय किया गया था। पंचायत चुनाव में भी सरकार इसी मॉडल को अपनाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित आयोग विभिन्न जिलों में जाकर ओबीसी आबादी का सर्वे करेगा और उसके बाद ही आरक्षण की अधिसूचना जारी होगी।

👉इस पूरे घटनाक्रम के बीच पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया है कि पंचायत चुनाव समय पर ही कराए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर आयोग गठन के विषय में चर्चा करेंगे। उनका कहना है कि आयोग गठित होने के बाद दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगा, जिससे आरक्षण की प्रक्रिया और चुनाव कार्यक्रम समय से पूरा किया जा सकेगा।

हालांकि प्रशासनिक स्तर पर आयोग गठन में हो रही देरी को देखते हुए यह सवाल बना हुआ है कि क्या सरकार तय समयसीमा में सभी औपचारिकताएं पूरी कर पाएगी, या फिर पंचायत चुनावों को आगे बढ़ाना पड़ेगा।

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