Gyan Prakash Dubey -NGV PRAKASH NEWS

ज्वलंत मुद्दों से भटकती समाजसेवा और चमकती स्वार्थ की राजनीति
बस्ती, 19 जनवरी 2026 —
आज के दौर में समाजसेवा के नाम पर सक्रिय कई युवा नेता और स्वयंभू समाजसेवी वास्तविक जनसमस्याओं से पूरी तरह दूर होते जा रहे हैं। सेवा के बजाय उनकी राजनीति केवल प्रदर्शन, ज्ञापन और सोशल मीडिया तक सिमट कर रह गई है। धरना-प्रदर्शन के नाम पर समाज को उकसाना, आपसी नफरत बढ़ाना और छोटी-छोटी बातों को बड़ा मुद्दा बनाना इनकी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है।
अधिकांश तथाकथित समाजसेवी संगठन केवल कागजी सक्रियता तक सीमित दिखाई देते हैं। ज्ञापन सौंपना, अखबारों में नाम छपवाना और सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराना ही उनकी प्राथमिकता बन गई है। कई बार ये लोग किसी घटना को धर्म और जाति का रंग देकर माहौल को गरमाने का काम करते हैं, ताकि खुद को बड़ा नेता साबित कर सकें।
देखा जा रहा है कि कुछ लोग किसी खास वर्ग या समुदाय पर टिप्पणी कर सुर्खियों में आने की कोशिश करते हैं। उनका उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना नहीं, बल्कि विवाद खड़ा कर अपनी नेतागिरी चमकाना होता है। शादी-ब्याह, ब्रह्मभोज या अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में केवल फोटो खिंचवाकर उसे सोशल मीडिया पर डाल देना ही इनके लिए समाजसेवा बन गई है।
विडंबना यह है कि जिन असली मुद्दों पर काम करने की जरूरत है, उनसे इनका कोई सरोकार नहीं रहता। किसी गरीब की बेटी की शादी हो, कोई निर्धन व्यक्ति गंभीर बीमारी से जूझ रहा हो, किसी परिवार के पास रहने के लिए आवास न हो, सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा हो रहा हो या तालाबों-पोखरों पर अतिक्रमण हो रहा हो—ऐसे ज्वलंत विषयों पर ये लोग कभी आगे नहीं आते। यदि कहीं पहुंच भी गए तो उनका काम केवल फोटो खिंचवाने तक सीमित रहता है।
समाज के अशिक्षित और बेरोजगार युवाओं को सही दिशा देने, उन्हें शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के बजाय ये लोग पढ़-लिख रहे युवाओं को भी आंदोलनकारी बनाने में जुटे रहते हैं। भड़काऊ भाषणों और उत्तेजक नारों के जरिये युवाओं की भावनाओं को भुनाना इनका मुख्य हथियार बन चुका है।
इस मामले पर वरिष्ठ सामाजिक लोगों का कहना है कि समाज को ऐसे दिखावटी समाजसेवकों से सावधान रहने की जरूरत है। असली समाजसेवा वही है, जो गरीब, जरूरतमंद और पीड़ित लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाए। लेकिन आज की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयान कर रही है, जहां सेवा कम और स्वार्थ अधिक हावी हो चुका है।
यदि यही हाल रहा तो समाज की असली समस्याएं और गहरी होती जाएंगी और ये स्वयंभू नेता केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते रहेंगे। समय की मांग है कि लोग ऐसे चेहरों को पहचानें और वास्तविक समाजसेवकों को आगे बढ़ाने में सहयोग करें।
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