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मूर्ति की परिक्रमा करने वाला कुत्ता न्यूरो का रोगी, इलाज के बाद हालत में सुधार
बिजनौर, 19 जनवरी 2026.
भारत में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो पेड़ों पर गांठ निकाली देख भगवान मांन उसकी पूजा करने लगते हैं, किसी पेड़ से केमिकल रिएक्शन होने की वजह से निकलने वाले धुएँ को चमत्कार मां उसकी पूजा शुरू कर देते हैं | ऐसे अनेकों उदाहरण है जहां पर बिना सोचे समझे या उसकी सत्यता परखे लोग उसे पर विश्वास कर लेते हैं और आस्था या चमत्कार या अंधविश्वास के बीच हम अंतर नहीं कर पाते |
यह भारत के लोग कमी नहीं है | यहां पर प्रकृति की पूजा करने की जो परंपरा है जिसके अंतर्गत हम जमीन से लेकर बृक्षों, पशु पक्षियों और पहाड़ो तक की पूजा करते हैं, वह हमारे दिमाग में इस कदर बैठ गया है कि हम किसी भी अनोखी घटना को चाहे वह किसी कारण से हुई हो उसे चमत्कार या भगवान की कृपा मां उसका पूजन शुरू कर देते हैं |
ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया जहां पर बिजनौर जिले के नगीना तहसील स्थित नंदपुर गांव के प्राचीन मंदिर में एक कुत्ते द्वारा लगातार हनुमान जी और मां दुर्गा की मूर्तियों की परिक्रमा करने का मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ था। स्थानीय लोगों ने इसे दैवीय चमत्कार मानते हुए कुत्ते की पूजा शुरू कर दी थी, लेकिन अब इस घटना का सच सामने आ गया है। जांच में पता चला कि कुत्ता किसी चमत्कार के कारण नहीं, बल्कि गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी के चलते ऐसा व्यवहार कर रहा था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि यह कुत्ता कई दिनों तक बिना रुके मंदिर परिसर में स्थापित हनुमान जी की मूर्ति का चक्कर लगाता रहा। दो दिन बाद उसने मां दुर्गा की मूर्ति की परिक्रमा शुरू कर दी। ग्रामीणों ने इस घटना को आस्था से जोड़ दिया | वैसे भी हमारे सनातन धर्म में कुत्ते को भैरव नाथ का अवतार माना जाता है | यहां भी वही हुआ और लोग कुत्ते को भैरव बाबा का अवतार मानकर उसकी पूजा-अर्चना शुरू कर दिये। लोग उसके आगे माथा टेकने लगे और मन्नतें भी मांगने लगे थे।
लगातार परिक्रमा करने के कारण कुत्ता पांच दिनों तक भूखा-प्यासा रहा और थकान से बेहाल हो गया। ठंड को देखते हुए मंदिर कमेटी ने उसे रजाई भी ओढ़ा दी, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। इसी बीच यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद पशु कल्याण से जुड़ी संस्था ‘प्रेमपथ’ की टीम मौके पर पहुंची।
एनजीओ की संचालक संध्या रस्तोगी और अश्वनी चित्रांश की टीम ने कुत्ते की जांच कराई, जिसमें सामने आया कि वह गंभीर डिहाइड्रेशन, कुपोषण और न्यूरोलॉजिकल समस्या से ग्रस्त है। डॉक्टरों के अनुसार बीमारी के कारण ही कुत्ता लगातार गोल-गोल चक्कर लगा रहा था। मंदिर परिसर में ही उसे फ्रूट थैरेपी ड्रिप लगाई गई, जिससे उसकी स्थिति में कुछ सुधार हुआ।
एनजीओ टीम के काफी प्रयासों के बाद मंदिर कमेटी को समझाकर कुत्ते को बेहतर इलाज के लिए नोएडा स्थित शिवालय वेलनेस सेंटर ले जाया गया। वहां उसकी एमआरआई कराई गई और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में इलाज शुरू किया गया। एक रात के इलाज के बाद कुत्ते ने करीब ढाई सौ ग्राम पनीर भी खाया, जो उसकी सेहत में सुधार का संकेत माना जा रहा है।
पशु चिकित्सकों के अनुसार कुत्ते के सैंपल लैब में भेजे गए हैं, ताकि किसी वायरल संक्रमण या अन्य गंभीर बीमारी की पुष्टि की जा सके। रिपोर्ट आने के बाद आगे का इलाज तय किया जाएगा। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है और धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
मामले के सामने आने के बाद भी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती रही। एनजीओ और डॉक्टरों की टीम लगातार लोगों से अपील कर रही है कि कुत्ते को परेशान न किया जाए और उसके इलाज में बाधा न डाली जाए। स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और एनजीओ के साथ समन्वय कर रहे हैं।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि कई बार अंधविश्वास और आस्था के बीच अंतर समझना जरूरी होता है। जो लोग इसे चमत्कार मान रहे थे, वही अब इलाज के बाद कुत्ते की हालत में सुधार देखकर सच्चाई को स्वीकार कर रहे हैं। यह मामला आस्था के साथ-साथ मानवता और पशु कल्याण की मिसाल भी बन गया है।
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