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यूजीसी नियम-2026 पर बवाल: भाजपा में उठी बगावत की आवाज, लखनऊ में 11 पदाधिकारियों का सामूहिक इस्तीफा, बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट ने छोड़ी नौकरी
लखनऊ, 26 जनवरी 2026.
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रस्तावित ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को प्रोत्साहित करने के नियम-2026’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। यूजीसी के इन नियमों के विरोध की आंच अब सत्तारूढ़ भाजपा तक पहुंच गई है। पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है और उत्तर प्रदेश में इसके चलते राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है।
यूजीसी नियमों को लेकर भाजपा में विरोध के सुर तेज होते जा रहे हैं। पार्टी के कई पदाधिकारियों ने अब तक अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के भाजपा एमएलसी देवेंद्र सिंह ने प्रदेश सरकार से नियमों पर पुनर्विचार की मांग की है, जबकि सांसद मनोज तिवारी ने भी सवर्ण समाज के अधिकारों और सम्मान की रक्षा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर हस्तक्षेप की मांग की है।
लखनऊ जिले की बीकेटी विधानसभा क्षेत्र में यूजीसी नियमों के विरोध ने बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। यहां कुम्हरावां मंडल के महामंत्री सहित कुल 11 पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इन इस्तीफों से संबंधित त्यागपत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। बीकेटी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक योगेश शुक्ला हैं।
इस्तीफा देने वालों में मंडल महामंत्री अंकित तिवारी, मंडल मंत्री महावीर सिंह, मंडल उपाध्यक्ष आलोक सिंह, शक्ति केंद्र संयोजक मोहित मिश्र, वेद प्रकाश सिंह, नीरज पांडेय, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष अनूप सिंह, मंडल महामंत्री राज विक्रम सिंह, पूर्व मंडल मंत्री अभिषेक अवस्थी, बूथ अध्यक्ष विवेक सिंह और पूर्व सेक्टर संयोजक कल सिंह शामिल हैं। मंडल महामंत्री अंकित तिवारी और मंडल मंत्री महावीर सिंह ने जिलाध्यक्ष को दिए गए इस्तीफे की पुष्टि भी की है।
इस पूरे प्रकरण पर भाजपा जिलाध्यक्ष विजय मौर्या का कहना है कि सोशल मीडिया पर पत्र प्रसारित होने की जानकारी उन्हें है, लेकिन फिलहाल किसी पदाधिकारी ने व्यक्तिगत रूप से उन्हें त्यागपत्र सौंपा नहीं है। वहीं, अंकित तिवारी ने कहा कि पार्टी जिन विचारों और सिद्धांतों के आधार पर बनी थी, उससे वह भटक रही है। उनका आरोप है कि यूजीसी नियम लागू कर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है, इसी कारण उन्होंने पार्टी के सभी दायित्वों से खुद को अलग कर लिया है।
यूजीसी नियमों का विरोध केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसका असर प्रशासनिक महकमे में भी दिखने लगा है। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए कानून के विरोध और प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित मारपीट की घटना को अपने इस्तीफे का आधार बताया है।
अलंकार अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल, देश के मुख्य चुनाव आयुक्त और उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश प्रांतीय सिविल सेवा से त्यागपत्र देने की जानकारी दी है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि यूजीसी कानून और माघ मेले के दौरान हुई घटनाओं से वह आहत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि सामान्य वर्ग और ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधित्व के लिए वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था पर विचार किया जाए, ताकि उनके हितों की रक्षा हो सके और केंद्र व राज्य सरकारों में फैली भ्रम की स्थिति को दूर किया जा सके।
यूजीसी नियम-2026 को लेकर बढ़ता विरोध सरकार और सत्तारूढ़ दल दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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