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नीट की तैयारी के दबाव में खौफनाक अंत: बेटे ने पैथोलॉजी संचालक पिता को गोली मारकर शव ड्रम में छिपाया


लखनऊ, 24 फरवरी 2026.
राजधानी के आशियाना इलाके में रिश्तों को झकझोर देने वाली वारदात सामने आई है, जहां लापता पैथोलॉजी संचालक का शव उनके ही घर में एक ड्रम के अंदर बरामद होने से सनसनी फैल गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पढ़ाई और करियर को लेकर पिता-पुत्र के बीच चल रहे तनाव ने इस खौफनाक घटना को जन्म दिया।
📍प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान वर्धमान पैथोलॉजी के संचालक मानवेंद्र सिंह के रूप में हुई है, जो 20 फरवरी से लापता थे। उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना आशियाना में पहले ही दर्ज कराई गई थी। सोमवार को सेक्टर एल स्थित मकान नंबर 91 से उनका शव ड्रम में बंद हालत में बरामद हुआ। इसके बाद पुलिस ने हत्या की आशंका के आधार पर जांच तेज कर दी।
➡️पुलिस के मुताबिक 20 फरवरी की सुबह पिता और बेटे के बीच प्रतियोगी परीक्षा और नीट की तैयारी को लेकर तीखी बहस हुई थी। आरोप है कि विवाद के दौरान पिता ने लाइसेंसी राइफल निकालकर बेटे को डराने की कोशिश की, लेकिन बाद में राइफल एक ओर रख दी। इसी दौरान 19 वर्षीय बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने कथित तौर पर राइफल उठाकर पिता के सीने में गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
गोली चलने की आवाज सुनकर घर में मौजूद 16 वर्षीय बेटी नीचे आई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बहन को धमकाया और घटना की जानकारी किसी को न देने की चेतावनी दी। भय के कारण बहन चुप रही।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने साक्ष्य मिटाने के लिए शव को क्षत-विक्षत कर ड्रम में छिपा दिया। कुछ अंगों को सदरौना इलाके के पास फेंकने की बात भी सामने आई है। डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर के अनुसार, 20 फरवरी को गुमशुदगी दर्ज होने के बाद बेटे से गहन पूछताछ की गई, जिसमें उसने सुबह करीब 4:30 बजे विवाद के बाद गोली मारने की बात स्वीकार की। फॉरेंसिक टीम ने मौके से अहम साक्ष्य जुटाए हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
पड़ोसियों के अनुसार, मानवेंद्र सिंह चार दिनों से दिखाई नहीं दे रहे थे, जिससे शक गहराया। पूछताछ में पहले बेटे ने आत्महत्या की बात कही, लेकिन सख्ती के बाद कथित रूप से पूरी घटना उजागर हुई। फिलहाल पुलिस आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है।
यह मामला न केवल पारिवारिक तनाव की भयावह परिणति को दर्शाता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि प्रतिस्पर्धा और अपेक्षाओं का दबाव किस हद तक युवाओं को मानसिक रूप से प्रभावित कर रहा है। पुलिस हर पहलू की जांच में जुटी है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके।
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