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“मदद के बहाने” नया साइबर ठगी का तरीका वायरल, विशेषज्ञों ने लोगों को किया सतर्क
नई दिल्ली, 26 फरवरी 2026.
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि मॉल, मेट्रो स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर “फोन चलाने में मदद” मांगने के बहाने लोगों के बायोमेट्रिक डेटा की चोरी की जा रही है। मैसेज में इसे एआई आधारित नया स्कैम बताते हुए आगाह किया गया है कि महज 30 मिनट में किसी भी व्यक्ति को भारी कर्ज में फंसाया जा सकता है।
शोसल मीडिया पर वायरल हो रहे खबरों के अनुसार अच्छे कपड़े पहने अधेड़ या बुजुर्ग व्यक्ति अनजान लोगों से अपना मोबाइल चलाने में मदद मांगते हैं। दावा किया जा रहा है कि फोन पहले से वीडियो कॉल या स्क्रीन रिकॉर्डिंग पर होता है और जैसे ही कोई व्यक्ति फोन छूता है, बोलता है या स्क्रीन देखता है, उसके फिंगरप्रिंट, आवाज और चेहरे से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड कर लिया जाता है। आगे आरोप है कि इस डेटा का उपयोग कर एआई के जरिए डिजिटल पहचान तैयार कर ऑनलाइन लोन और वित्तीय लेनदेन किए जाते हैं।
हालांकि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के दावों की आधिकारिक पुष्टि सीमित है और अधिकांश मामलों में ठगी पारंपरिक सोशल इंजीनियरिंग, ओटीपी साझा कराने या फर्जी केवाईसी के माध्यम से होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक स्मार्टफोन में बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षित एन्क्रिप्टेड हार्डवेयर में संरक्षित रहता है और सामान्य परिस्थितियों में केवल फोन छू लेने भर से डेटा चोरी होना आसान नहीं है।
फिर भी पुलिस और साइबर सेल लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों पर अजनबियों का फोन हाथ में लेने से बचने, अनजान वीडियो कॉल स्वीकार न करने, ओटीपी या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करने और संदिग्ध लिंक या ऐप डाउनलोड न करने की हिदायत दी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ठग अक्सर दया, जल्दबाजी या आत्मविश्वास का फायदा उठाते हैं। इसलिए किसी भी अनजान स्थिति में सतर्कता और डिजिटल सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन करना आवश्यक है।
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