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1 मार्च से सिम-बाइंडिंग लागू: बिना सिम के नहीं चलेंगे चैटिंग ऐप्स, सरकार सख्त
नई दिल्ली, 27 फरवरी 2026.
इंटरनेट पर चैट और कॉलिंग ऐप्स इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए 1 मार्च से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने ‘सिम-बाइंडिंग’ नियम को लागू करने की घोषणा कर दी है। इस नए प्रावधान के तहत जिस सिम कार्ड से अकाउंट बनाया गया है, वह सिम संबंधित मोबाइल फोन में फिजिकल रूप से मौजूद और सक्रिय होना अनिवार्य होगा, अन्यथा ऐप काम नहीं करेगा।
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि 1 मार्च से यह नियम हर हाल में लागू होगा और इसकी डेडलाइन आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इसका सीधा असर WhatsApp, Telegram और Signal जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर पड़ेगा। अब इन ऐप्स को चलाने के लिए वही सिम कार्ड मोबाइल में लगा होना जरूरी होगा, जिससे अकाउंट रजिस्टर किया गया है। यदि सिम निकाल दिया गया या किसी दूसरे डिवाइस में डाल दिया गया, तो संबंधित फोन में ऐप की सेवाएं बंद हो जाएंगी।
नए नियम के तहत अकाउंट को सिम से ‘बाइंड’ यानी स्थायी रूप से जोड़ा जाएगा। इसका मतलब यह है कि यूजर अपने फोन में किसी दूसरे नंबर से बना अकाउंट तब तक इस्तेमाल नहीं कर सकेगा, जब तक वह सिम उसी डिवाइस में मौजूद न हो। अभी तक कई लोग बिना सिम कार्ड के भी वाई-फाई के जरिए इन ऐप्स का उपयोग कर रहे थे, लेकिन 1 मार्च के बाद यह संभव नहीं होगा।
सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक स्कैमर्स अक्सर फर्जी या दूसरे के नाम पर लिए गए नंबरों का इस्तेमाल कर कॉल और मैसेज के जरिए ठगी करते हैं। सिम-बाइंडिंग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐप वही व्यक्ति चला रहा है, जिसके पास संबंधित सिम कार्ड है।
हालांकि इस फैसले पर टेक कंपनियों ने चिंता जताई है। Meta और Google जैसी कंपनियों का कहना है कि तकनीकी रूप से यह व्यवस्था लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उनका तर्क है कि कई टैबलेट और लैपटॉप में सिम स्लॉट नहीं होता, जिससे ऐसे डिवाइस पर ऐप चलाना मुश्किल हो जाएगा और यूजर अनुभव प्रभावित हो सकता है। इसके बावजूद सरकार ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।
कंप्यूटर या लैपटॉप पर लिंक्ड डिवाइस के रूप में WhatsApp इस्तेमाल करने वालों के लिए भी बदलाव होगा। जानकारी के अनुसार, ऐसे यूजर्स का सेशन हर छह घंटे में स्वतः लॉग आउट हो जाएगा, जिसके बाद दोबारा सत्यापन करना होगा।
1 मार्च से लागू होने जा रहा यह नियम डिजिटल संचार की दुनिया में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं से लेकर कंपनियों तक पर पड़ेगा।
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