पशुओं के लिए गौशाला स्थापित करने की प्रक्रिया, नियम और व्यवस्थाएं…….

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आवारा पशुओं के लिए गौशाला स्थापित करने की प्रक्रिया, नियम और व्यवस्थाएं

बस्ती, 01 मार्च 2026.

प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आवारा पशुओं की समस्या को देखते हुए कई सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों द्वारा निजी जमीन पर गौशाला स्थापित करने की पहल की जा रही है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था विशेष रूप से निराश्रित और आवारा पशुओं के संरक्षण के उद्देश्य से गौशाला खोलना चाहती है, तो उसे कुछ निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कानूनी प्रावधानों का पालन करना आवश्यक होता है।

➡️सबसे पहले भूमि का स्वामित्व स्पष्ट होना चाहिए। यदि भूमि निजी है और कृषि श्रेणी में दर्ज है तो पशुपालन गतिविधि की अनुमति सामान्यतः मिल जाती है, लेकिन आवारा पशुओं को आश्रय देने के लिए ग्राम पंचायत या नगर निकाय को औपचारिक सूचना देना आवश्यक माना जाता है। कई जिलों में निराश्रित गोवंश संरक्षण के लिए स्थानीय प्रशासन से सहमति या पंजीकरण की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ती है।

➡️यदि गौशाला सामाजिक सेवा के रूप में चलाई जानी है तो ट्रस्ट या सोसाइटी का पंजीकरण कराया जाना चाहिए। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहती है और भविष्य में किसी प्रकार की सरकारी योजना या अनुदान का लाभ लेने में सुविधा मिलती है।

📍हालांकि यदि संचालक स्वयं के संसाधनों से बिना किसी लोन या अनुदान के संचालन करना चाहते हैं, तब भी स्थानीय पशुपालन विभाग में जानकारी देना अनिवार्य है।

➡️पशुपालन विभाग के माध्यम से पशुओं का टैगिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और नियमित टीकाकरण सुनिश्चित कराया जाता है। आवारा पशुओं को सीधे पकड़ने के बजाय स्थानीय प्रशासन या नगर निकाय के सहयोग से शिफ्ट कराया जाना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की कानूनी आपत्ति न हो। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।

➡️व्यवस्थागत रूप से हवादार और मजबूत शेड, स्वच्छ पेयजल, हरा व सूखा चारा, गोबर व अपशिष्ट प्रबंधन, सुरक्षा घेरा तथा नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था जरूरी है। बड़े स्तर पर संचालन की स्थिति में सीसीटीवी और रजिस्टर में पशुओं का विवरण दर्ज करना भी उपयोगी माना जाता है।

➡️विशेषज्ञों के अनुसार यदि 20 से 25 निराश्रित पशुओं के लिए गौशाला बनाई जाए तो प्रारंभिक ढांचा तैयार करने में 5 से 10 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है, जो स्थान, निर्माण सामग्री और सुविधाओं पर निर्भर करता है। इसके बाद मासिक चारा, देखभाल और चिकित्सा खर्च अलग से जुड़ता है।

➡️जानकारों का मानना है कि सुनियोजित और पारदर्शी तरीके से आवारा पशुओं के लिए गौशाला स्थापित करने से न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिल सकता है। उचित अनुमति और विभागीय समन्वय के साथ यह पहल सामाजिक जिम्मेदारी का प्रभावी उदाहरण बन सकती है।

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