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चंद्र ग्रहण 2026: ग्रहण काल में क्या करें, क्या न करें — सूतक से मोक्ष तक पूरी जानकारी
मंगलवार को पड़ने वाला चंद्र ग्रहण धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत में यह ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक दृश्य रहेगा।
ग्रहण से पूर्व लगने वाला सूतक काल सुबह 6:20 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। सूतक काल को धार्मिक मान्यताओं में विशेष सावधानी का समय माना जाता है।
📍नीचे ग्रहण से जुड़ी पूरी जानकारी विस्तार से दी जा रही है—
⏰ ग्रहण का समय (भारत में दृश्य अवधि)
सूतक प्रारंभ: सुबह 6:20 बजे
ग्रहण प्रारंभ: दोपहर 3:20 बजे
ग्रहण समाप्त (मोक्ष काल): शाम 6:47 बजे
सूतक काल ग्रहण से लगभग 9 घंटे पूर्व प्रारंभ माना जाता है।
🌑 सूतक काल में क्या करें?
1️⃣ भजन-पूजन और मंत्र जाप
इस समय भगवान का ध्यान, गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या अपने इष्ट मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति मिलती है।
2️⃣ तुलसी पत्र का उपयोग
सूतक से पहले भोजन में तुलसी पत्र डाल दें। इससे भोजन शुद्ध माना जाता है।
3️⃣ गर्भवती महिलाएं सावधानी रखें
घर के अंदर रहें।
तेज धारदार वस्तुओं का उपयोग न करें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार रक्षा के लिए मंत्र जाप करें।
4️⃣ ग्रहण समाप्ति के बाद
स्नान करें।
घर में गंगाजल छिड़कें।
मंदिर में दीप जलाएं।
जरूरतमंदों को दान करें।
🚫 ग्रहण काल में क्या न करें?
❌ भोजन न करें
सूतक लगने के बाद भोजन करना वर्जित माना गया है (बच्चों, वृद्धों और बीमारों को छूट है)।
❌ शुभ कार्य न करें
विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
नई वस्तु की खरीदारी टाल दी जाती है।
❌ मंदिर के कपाट बंद
अधिकांश मंदिरों में ग्रहण काल में कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
❌ नकारात्मक सोच से बचें
धार्मिक मान्यता है कि इस समय मन की स्थिति अधिक प्रभावशाली होती है, इसलिए क्रोध और विवाद से दूर रहें।
🔭 वैज्ञानिक दृष्टिकोण
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है।
वैज्ञानिक रूप से इसे सामान्य खगोलीय घटना माना जाता है और इसे नंगी आंखों से देखना सुरक्षित होता है।
👶 विशेष सावधानियां
गर्भवती महिलाएं धारदार वस्तु, सुई-धागा या काटने-छांटने का कार्य न करें (धार्मिक मान्यता)।
छोटे बच्चों को अनावश्यक रूप से बाहर न रखें।
ग्रहण के बाद घर की सफाई और स्नान करना परंपरा का हिस्सा है।
🌊 दान और पुण्य
ग्रहण समाप्ति के बाद—
गरीबों को अन्न दान
वस्त्र दान
गाय को चारा
ब्राह्मण भोजन (धार्मिक मान्यता अनुसार)
पुण्यकारी माना जाता है।
📌 निष्कर्ष
चंद्र ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, लेकिन भारतीय संस्कृति में इसका आध्यात्मिक महत्व भी है।
आस्था और विज्ञान दोनों का संतुलन रखते हुए सावधानी बरतें।
समय याद रक्खें.
🕒 ग्रहण — 3:20 PM से 6:47 PM
🌑 सूतक — सुबह 6:20 AM से प्रारंभ
आस्था और सावधानी के साथ इस खगोलीय घटना का अनुभव करें।
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