
लिव-इन रिलेशनशिप पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, शादीशुदा व्यक्ति के साथ रहना अपराध नहीं
प्रयागराज, 27 मार्च 2026.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी शादीशुदा पुरुष का किसी वयस्क महिला के साथ सहमति से लिव-इन में रहना अपराध नहीं है। कोर्ट ने कहा कि कानून को सामाजिक नैतिकता से अलग रखा जाना चाहिए और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि है।
मामला उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें एक शादीशुदा पुरुष और महिला ने सुरक्षा की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि महिला के परिजन उनके रिश्ते का विरोध कर रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। कोर्ट ने पाया कि दोनों बालिग हैं और आपसी सहमति से साथ रह रहे हैं, ऐसे में यह किसी भी कानून के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जब कोई कृत्य कानूनन अपराध नहीं है, तो सामाजिक नैतिकता के आधार पर किसी के अधिकारों को नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में दो वयस्कों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसका कर्तव्य है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए 8 अप्रैल की तारीख तय की है। साथ ही याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने महिला के परिवार को भी दंपति को किसी प्रकार की हानि पहुंचाने या संपर्क करने से प्रतिबंधित किया है।
NGV PRAKASH NEWS
