लॉकडाउन की खबरों पर लगा विराम-देश में नहीं लगेगा लॉकडाउन-पीएम मोदी…….

NGV PRAKASH NEWS

नई दिल्ली, 27 मार्च 2026 |

वेस्ट एशिया में गहराते संकट के बीच शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक कर हालात की व्यापक समीक्षा की। करीब दो घंटे तक चली इस उच्चस्तरीय बैठक में मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, संभावित युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने की आशंका से उत्पन्न वैश्विक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए देश को “टीम इंडिया” की भावना के साथ काम करना होगा। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने यह भी साफ कर दिया कि वर्तमान परिस्थितियों के बावजूद देश में किसी प्रकार का लॉकडाउन लगाने की कोई योजना नहीं है, जिससे आम जनता को राहत मिली है।

आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर

पीआईबी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और नागरिकों के हितों की रक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने वैश्विक आपूर्ति शृंखला में संभावित व्यवधानों को देखते हुए राज्यों से सतर्क रहने और जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश देते हुए कहा कि आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार से स्थिति और बिगड़ सकती है, इसलिए सटीक और विश्वसनीय जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।

राज्यों ने दी तैयारियों की जानकारी

बैठक में शामिल मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्यों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा दिलाया और कहा कि हालात फिलहाल सामान्य हैं। सभी राज्यों ने केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए भरोसा जताया कि सामूहिक प्रयासों से इस वैश्विक संकट का प्रभाव आम जनता पर न्यूनतम रखा जाएगा।

चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री अनुपस्थित

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हो सके। इन राज्यों में चुनावी आचार संहिता लागू होने के कारण वे इस चर्चा का हिस्सा नहीं बन पाए।

कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी

इस हाई-लेवल बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। इनमें उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साय, आंध्र प्रदेश के चंद्रबाबू नायडू, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी, पंजाब के भगवंत मान और जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला प्रमुख रहे।

इसके अलावा झारखंड के हेमंत सोरेन, गुजरात के भूपेंद्र पटेल और महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस ने भी अपने-अपने राज्यों की तैयारियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया।

‘आम आदमी पर आंच न आए’

प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि वैश्विक संकट का असर आम नागरिकों तक नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने राज्यों से अपील की कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखा जाए और आम जनता की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने कहा कि संकट के समय केंद्र और राज्यों को एक परिवार की तरह मिलकर काम करना होता है, ताकि हर स्तर पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

कोरोना काल की याद दिलाई

प्रधानमंत्री ने मौजूदा हालात की तुलना COVID-19 महामारी से करते हुए कहा कि जिस तरह उस दौरान केंद्र और राज्यों ने मिलकर काम किया था, उसी भावना की आज फिर जरूरत है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2020 में महामारी के दौरान लगातार मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद और समन्वय के जरिए ही देश ने बड़ी चुनौती का सामना किया था।

एकजुटता ही सबसे बड़ा हथियार

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि और आपूर्ति शृंखला पर खतरे के बीच यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। केंद्र सरकार की रणनीति साफ है कि वैश्विक संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर न्यूनतम रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि “टीम इंडिया” का मंत्र ही इस चुनौती से निपटने का सबसे कारगर उपाय साबित होगा। सरकार का फोकस इस बात पर है कि वेस्ट एशिया की स्थिति का असर भारत की रसोई और बाजार तक न पहुंचे, और देश स्थिरता के साथ आगे बढ़ता रहे।

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