सपा नेता के श्रीराम सहित देवी देवताओं पर टिप्पणी से गरमाई राजनीति- सपा नें पार्टी से निकाल झाड़ा पल्ला…….

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💥हरदोई में सपा नेता के विवादित बयान से मचा सियासी बवाल, गिरफ्तारी के बाद और गरमाई राजनीति

हरदोई, 28 मार्च 2026.

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से सामने आए एक वायरल वीडियो ने प्रदेश की राजनीति में तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर रामनवमी के अवसर पर समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा भगवान राम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए शुभकामनाएं दी जा रही थीं, वहीं दूसरी ओर पार्टी से जुड़े रहे नेता यदुनंदन लाल वर्मा के कथित आपत्तिजनक बयान ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। वीडियो के वायरल होते ही न केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी व्यापक आक्रोश देखने को मिला।

📍मामले के केंद्र में यदुनंदन लाल वर्मा हैं, जो हरदोई में समाजवादी पार्टी के सक्रिय और पुराने चेहरों में गिने जाते रहे हैं। संगठनात्मक अनुभव रखने वाले वर्मा पूर्व में प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं, हालांकि वर्तमान में उनके पास कोई औपचारिक पद नहीं बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वे सांडी थाना क्षेत्र के अंटवा खेरवा गांव में आयोजित सम्राट अशोक जयंती कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने सार्वजनिक मंच से भगवान श्रीराम, माता कौशल्या और धार्मिक ग्रंथों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। आरोप है कि उन्होंने वाल्मीकि रामायण का संदर्भ देते हुए भ्रामक और अपमानजनक बातें कहीं।

📍जैसे ही इस कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पूरे जिले में विरोध की लहर दौड़ गई। हरपालपुर थाने में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 299 और 196 के साथ सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया कि वीडियो के कारण क्षेत्र में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया है, जिससे कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

📍विवाद बढ़ते ही हिंदू संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सवायजपुर कोतवाली के सामने नारेबाजी हुई और आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग उठी। लखनऊ में भी अखिल भारतीय हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए हजरतगंज कोतवाली में तहरीर दी और कड़ी कार्रवाई की मांग की। संगठन के पदाधिकारियों का कहना था कि इस तरह के बयान न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं, बल्कि समाज में विभाजन पैदा करने का भी प्रयास करते हैं।

📍राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा तेजी से गरमाया। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इसे समाजवादी पार्टी के चरित्र से जोड़ते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस प्रकार की भाषा अस्वीकार्य है। वहीं समाजवादी पार्टी ने इस मामले से खुद को अलग करते हुए बयान की कड़ी निंदा की। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदुनंदन लाल वर्मा किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं और उनके व्यक्तिगत बयान से पार्टी का कोई संबंध नहीं है। पार्टी के जिला स्तर पर भी उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने की बात सामने आई है।

📍प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तेजी से कार्रवाई की। पुलिस ने यदुनंदन लाल वर्मा को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। प्रभारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार पंकज के अनुसार, मामले की जांच जारी है और वायरल वीडियो की सत्यता की भी जांच की जा रही है, क्योंकि वीडियो के समय और संदर्भ को लेकर अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है।

📍इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक मंचों से दिए जाने वाले बयान किस हद तक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ होने चाहिए। खासकर धार्मिक विषयों पर की गई टिप्पणियां किस तरह से सामाजिक तनाव और राजनीतिक विवाद का कारण बन सकती हैं, यह हरदोई की इस घटना से साफ दिखाई दे रहा है।

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