किडनी ट्रांसप्लांट का बड़ा रैकेट बेनकाब, 60 लाख के सौदे में 9.5 लाख देकर फंसाए जाते थे युवक

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कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट का बड़ा रैकेट बेनकाब, 60 लाख के सौदे में 9.5 लाख देकर फंसाए जाते थे युवक

कानपुर 30 मार्च 2026|

कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर चल रहे एक बड़े संगठित रैकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में सामने आया है कि देश के कई राज्यों से युवकों को लालच देकर उनकी किडनी का सौदा कराया जा रहा था। इस अवैध खेल में शहर के कई निजी अस्पतालों की संलिप्तता भी उजागर हुई है।

मामले की जांच के दौरान एक युवक आईसीयू में भर्ती मिला, जो इस पूरे नेटवर्क की कड़ी साबित हुआ। जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड निवासी युवक को 60 लाख रुपये में किडनी बेचने का लालच दिया गया था, लेकिन उसे मात्र 9.50 लाख रुपये ही दिए गए। रकम को लेकर विवाद हुआ तो पूरे सिंडीकेट की परतें खुलनी शुरू हो गईं।

लालच देकर फंसाए जाते थे युवक

पुलिस जांच में सामने आया है कि दलालों का एक नेटवर्क उत्तराखंड, बिहार, नेपाल और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ था। यह गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर युवकों को निशाना बनाकर उन्हें मोटी रकम का झांसा देता था और कानपुर बुलाकर किडनी ट्रांसप्लांट कराता था।

बताया जा रहा है कि कल्याणपुर क्षेत्र के एक अपार्टमेंट में सक्रिय दलाल शिवम अग्रवाल उर्फ ‘काना’ युवकों को फंसाने का काम करता था। इसके बाद उन्हें रावतपुर स्थित एक निजी अस्पताल में ले जाकर ट्रांसप्लांट कराया जाता था।

अस्पतालों में हुआ खेल, डॉक्टर बाहर से बुलाए जाते थे

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस अवैध ट्रांसप्लांट के लिए लखनऊ, दिल्ली और मुंबई से विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाया जाता था। पूरी प्रक्रिया में नेफ्रोलॉजिस्ट, ट्रांसप्लांट सर्जन, एनेस्थेटिस्ट और अन्य मेडिकल स्टाफ की टीम शामिल होती थी, जिससे यह रैकेट बेहद संगठित तरीके से संचालित हो रहा था।

एक के बाद एक छापेमारी, कई हिरासत में

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कल्याणपुर, रावतपुर और पनकी रोड स्थित कई अस्पतालों में ताबड़तोड़ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान तीन अस्पताल संचालकों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें एक महिला डॉक्टर और उनके पति भी शामिल हैं। साथ ही मुख्य दलाल को भी पकड़कर पूछताछ की जा रही है।

छापेमारी के दौरान कई चौंकाने वाले दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच जारी है।

डोनर और मरीज दोनों पुलिस निगरानी में

किडनी डोनर और रिसीवर दोनों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। फिलहाल दोनों पुलिस निगरानी में हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इनके बयान से रैकेट के और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

पुलिस कमिश्नर का बयान

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी गहराई से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि “जो भी अस्पताल या व्यक्ति इस अवैध कारोबार में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही पूरे सिंडीकेट का पर्दाफाश किया जाएगा।”

जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद

फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें लगातार छापेमारी और जांच में जुटी हैं। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि यह कोई छोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक बड़ा संगठित नेटवर्क है, जो लंबे समय से सक्रिय था।

आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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