NGV PRAKASH NEWS

अकेलेपन की मार: जिंदा रहते खुद की तेरहवीं कर रहा एक बुजुर्ग, 1900 लोगों को भेजा न्योता
औरैया, 31 मार्च 2026
💥 जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर जब इंसान को सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी वक्त अगर चारों तरफ सन्नाटा हो जाए तो दर्द शब्दों से बाहर निकलकर फैसलों में दिखने लगता है। औरैया जिले के लक्ष्मणपुर गांव में 65 वर्षीय राकेश यादव की कहानी कुछ ऐसी ही है, जिसने हर सुनने वाले को अंदर तक झकझोर दिया है।
📍राकेश यादव ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो सुनने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन उसके पीछे छिपा दर्द बहुत गहरा है। उन्होंने तय किया है कि वह जीते जी अपनी ही तेरहवीं का भोज कराएंगे। सोमवार को इसके लिए गांव-गांव करीब 1900 लोगों को निमंत्रण भेजा गया है, ताकि लोग आएं, खाना खाएं और उनके जीवन के इस अनोखे लेकिन भावुक क्षण के गवाह बनें।
📍राकेश तीन भाइयों में सबसे बड़े थे, लेकिन किस्मत ने उनका पूरा परिवार उनसे छीन लिया। छोटे भाई चंद्रपाल यादव की बीमारी से मौत हो गई, जबकि दूसरे भाई नरेश यादव की हत्या कर दी गई। तीनों भाइयों ने कभी शादी नहीं की। एक के बाद एक हुए इन हादसों ने राकेश की जिंदगी में ऐसा खालीपन छोड़ दिया, जिसे वह कभी भर नहीं सके। अब उनके पास सिर्फ एक विवाहित बहन है, जो अपने परिवार में व्यस्त है।
📍राकेश बताते हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की सताती है कि जब वह इस दुनिया में नहीं रहेंगे, तब उनका अंतिम संस्कार कौन करेगा, उनकी तेरहवीं कौन करेगा। यही सोच उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ती रही और आखिरकार उन्होंने खुद ही अपनी तेरहवीं करने का फैसला ले लिया। उनका कहना है कि उन्होंने अपना पैतृक घर भी एक रिश्तेदार को दान कर दिया है और अब वह एक साधारण मड़ैया में जीवन गुजार रहे हैं।
📍गांव में इस खबर के फैलते ही चर्चा का माहौल है। कोई इसे उनकी मजबूरी बता रहा है, तो कोई इसे अकेलेपन की चरम पीड़ा मान रहा है। हालांकि राकेश ने साफ किया है कि यह आयोजन सिर्फ भोज तक सीमित रहेगा, किसी तरह का पिंडदान नहीं कराया जाएगा।
📍राकेश के मन में रिश्तेदारों को लेकर भी भरोसा नहीं बचा है। उनका कहना है कि बुढ़ापे में न तो कोई उनकी देखभाल करेगा और न ही उनके जाने के बाद कोई रस्म निभाएगा। यही वजह है कि उन्होंने सोचा कि क्यों न जीते जी ही अपना सब कुछ पूरा कर लिया जाए। उन्होंने वर्षों की मेहनत-मजदूरी से जो पैसा बचाया, उसी से इस बड़े भोज का आयोजन कर रहे हैं।
➡️यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस सच्चाई का आईना है, जिसमें अकेलापन इंसान को जीते जी अपने ही अस्तित्व का अंत मानने पर मजबूर कर देता है।
NGV PRAKASH NEWS
