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शराब ठेकों के आसपास की दुकानें बनी शराब पीने की सुरक्षित जगह.
बस्ती.
जिले में शराब के ठेकों के आसपास तेजी से पनप रही अव्यवस्था अब कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। ठेकों के बगल में संचालित हो रही तथाकथित “रेस्टोरेंट” और “जलपान गृह” की दुकानों ने खुलेआम शराबियों के अड्डे का रूप ले लिया है, जहां दिन चढ़ते ही शराबियों का जमावड़ा शुरू हो जाता है और शाम तक यह भीड़ बेकाबू माहौल में बदल जाती है।
📍सुबह 10 बजे के बाद से ही इन दुकानों पर शराब पीने वालों की भीड़ जुटने लगती है। जैसे-जैसे शाम होती है, यह भीड़ बढ़ती जाती है और मुख्य मार्गों व संपर्क मार्गों पर चलना तक मुश्किल हो जाता है। हालात ऐसे हो जाते हैं कि आम नागरिक, खासकर महिलाएं, इन रास्तों से गुजरने में खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं।
📍सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन दुकानों में खुलेआम शराब सेवन कराया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार केवल लाइसेंस प्राप्त “मॉडल शॉप” में ही बैठकर शराब पीने की अनुमति होती है। इसके बावजूद जिले के कई हिस्सों में ठेकों के आसपास बनी दुकानों में न केवल शराब परोसी जा रही है, बल्कि अंदरूनी हिस्सों में “स्पेशल इंतजाम” भी किए जाते हैं, जहां कानून का कोई डर नजर नहीं आता।
📍महिलाओं और राहगीरों का कहना है कि शाम के समय इन इलाकों से गुजरना बेहद कठिन हो जाता है। नशे में धुत लोग अक्सर अश्लील टिप्पणियां करते हैं और कई बार छेड़खानी की घटनाएं भी सामने आती हैं। इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही है।
📍लोगों का आरोप है कि “ रेस्टोरेंट” के नाम पर चल रही इन दुकानों का असली मकसद सिर्फ शराबियों को बैठने और पीने की सुविधा देना है। बाहर से सामान्य दुकान का रूप देने के लिए कुछ खाने-पीने की चीजें रखी जाती हैं, लेकिन अंदर का माहौल पूरी तरह शराबखोरी का होता है। यह सब कुछ खुलेआम हो रहा है, जिससे प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
➡️स्थिति की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि जिन स्थानों पर ये दुकानें संचालित हो रही हैं, उनमें से कई मुख्य सड़कों और भीड़भाड़ वाले मार्गों पर स्थित हैं। ऐसे में यह समस्या सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि आम जनजीवन और सामाजिक माहौल को भी प्रभावित कर रही है।
📍अब सवाल यह उठता है कि जब नियम स्पष्ट हैं और अवैध गतिविधियां खुलेआम हो रही हैं, तो आखिर प्रशासन और पुलिस कब जिम्मेदारी तय करेगी? क्या इन दुकानों पर कार्रवाई होगी या फिर यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?
जरूरत है कि साथ ही शाम के समय संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाई जाय ताकि महिलाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
📍फिलहाल यह मामला प्रशासनिक इच्छाशक्ति और कार्रवाई की परीक्षा बन चुका है।
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