जी.पी. दुबे
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दबंगों द्वारा चौथे स्तंभ को समाप्त करने की कोशिश प्रशासन बना हुआ है मूक दर्शक
13 मई 24.
प्रायः प्रत्येक दिन कहीं ना कहीं यह जरूर सुनाई पड़ता है कि अमुक जगह पत्रकार को पीटा गया, उसे गाली दी गई, यह फला पत्रकार को दबंगों ने गोली मार दी |
मंच से बयान देने वाले नेता भले यह कहते हो कि पत्रकारों को सुरक्षा दी जाए, कोर्ट द्वारा भी पत्रकारों को सुरक्षा देने की बात कही गई है |
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही पत्रकारों के आजादी की बात करते हो लेकिन हो रहा इसका उल्टा |
शासन प्रशासन स्तर से भी कुछ हाई प्रोफाइल पत्रकारों को छोड़कर बाकी पत्रकारों के लिए कुछ नहीं करते बल्कि उल्टा इन्हे फर्जी मुकदमे में फंसा कर जेल भेजने की धमकी भी दे देते हैं |
पत्रकार कितना सुरक्षित है इसका उदाहरण आज दो घटनाओं से पता चलता है जहां जौनपुर के शाहगंज में शाहगंज कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत इमरानगंज में भरे बाजार में न्यूज़ पोर्टल सुदर्शन के पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव को दबंगों द्वारा गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया |
उनकी गलती केवल इतनी थी कि वह भू माफियाओं के खिलाफ समाचार लिख रहे थे |
दूसरी घटना में प्रतापगढ़ में आज पेपर के पत्रकार बसंत सिंह को बाइक सवार बदमाशों द्वारा गोली मार दी गई | पेशे से अध्यापक बसंत सिंह को अंतू थाना क्षेत्र के कटका बाजार के पास स्थिति विद्यालय के पास बदमाशों द्वारा गोली मारी गई |
बसंत सिंह बंजर डीह गांव के प्रधान पति भी हैं |
जहां जौनपुर के शाहगंज में आशुतोष श्रीवास्तव को बदमाशों द्वारा गोली मारकर छलनी कर दिया गया और उनके मृत्यु हो गई, वही प्रतापगढ़ में घायल बसंत सिंह का इलाज प्रतापगढ़ मेडिकल कॉलेज में चल रहा है |
समाज का आईना कहे जाने वाले पत्रकार जिनका ना तो कोई सरकारी मदद मिलती है ना ही पेपर की तरफ से पारिश्रमिक मिलता है और ना ही सरकार की तरफ से किसी प्रकार की सुरक्षा या सुविधा मिलती है |
सच्चाई लिखने के बाद उनको सभी की तरफ से धमकी गली मारपीट और मौत का अंजाम देखना पड़ता है |

