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बस्ती में ‘बहू-बेटी सम्मेलन’ कार्यशाला आयोजित, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर बनी रणनीति
बस्ती, 01 जून 2026.
महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों और लिंग आधारित हिंसा की रोकथाम के उद्देश्य से मिशन शक्ति अभियान के तहत सोमवार को पुलिस लाइन सभागार, बस्ती में यूनिसेफ और दिशा संस्था के सहयोग से “बहू-बेटी सम्मेलन” विषय पर एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों, महिला पुलिस कर्मियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों तथा यूनिसेफ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस उपमहानिरीक्षक बस्ती परिक्षेत्र संजीव त्यागी रहे, जबकि पुलिस अधीक्षक बस्ती डॉ. यशवीर सिंह और अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ तथा अतिथियों का स्वागत पौधा भेंट कर किया गया।
अपने संबोधन में डीआईजी संजीव त्यागी ने कहा कि गोरखपुर जोन में मिशन शक्ति अभियान के तहत लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज में किशोरियों के घर छोड़कर जाने की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय हैं और इस दिशा में व्यापक जागरूकता की आवश्यकता है। उन्होंने मिशन शक्ति केंद्रों को निर्देश दिया कि वे किशोर-किशोरियों को सामाजिक, कानूनी और सुरक्षा संबंधी विषयों पर जागरूक करें।
डीआईजी ने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को उनकी सुरक्षा और सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग होती हैं और अन्याय का बेहतर तरीके से सामना कर सकती हैं। उन्होंने लड़कियों को विवाह संबंधी निर्णय लेने की स्वतंत्रता दिए जाने पर भी बल दिया और कहा कि बिना सहमति के कराए गए विवाह कई बार गंभीर सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं का कारण बनते हैं।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ पुरुषों के खिलाफ संघर्ष नहीं, बल्कि महिलाओं को समान अवसर, सुरक्षा, सम्मान और अधिकार उपलब्ध कराना है। साथ ही उन्होंने पुलिस कर्मियों को निर्देशित किया कि वे महिलाओं से जुड़े मामलों में पूरी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और पेशेवर दृष्टिकोण के साथ कार्य करें तथा तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि “बहू-बेटी सम्मेलन” पहल समाज में लिंग आधारित भेदभाव को कम करने और महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने हाल ही में नियुक्त महिला आरक्षियों से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचकर पीड़ित महिलाओं की सहायता करने और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि कई बार अपराध के आंकड़ों में वृद्धि का अर्थ अपराध बढ़ना नहीं होता, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अब लोग खुलकर शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने महिला पुलिस कर्मियों से व्यक्तिगत रुचि लेकर पीड़ित महिलाओं की सहायता करने और उन्हें उचित मार्गदर्शन देने की अपेक्षा जताई।
कार्यशाला के दौरान यूनिसेफ की राज्य सलाहकार पल्लवी राय ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा से जुड़े आंकड़ों और उनके सामाजिक कारणों पर प्रकाश डाला। वहीं मंडलीय बाल संरक्षण सलाहकार शैलेश प्रताप सिंह ने “बहू-बेटी सम्मेलन” की अवधारणा, उद्देश्य, कार्यप्रणाली और सामुदायिक भागीदारी की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी।
यूनिसेफ के राज्य सलाहकार महर्षि अग्निहोत्री ने महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों, यौन अपराधों में हुए कानूनी संशोधनों और मिशन शक्ति केंद्रों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने गैर सरकारी संगठनों, चिकित्सा विशेषज्ञों, काउंसलरों और मीडिया के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यशाला में जनपद के सभी पुलिस सर्किलों से पुलिस उपाधीक्षक, विभिन्न थानों के मिशन शक्ति केंद्र प्रभारी, महिला पुलिस कर्मी, विभिन्न विभागों के अधिकारी, यूनिसेफ और दिशा संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझावों और रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
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