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राहुल गांधी के पीएम आवास धरने पर सियासत तेज: AAP के संजय सिंह ने लगाए गंभीर आरोप, बोले— CJP आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश
➡️ जिस तरह की प्रतिक्रिया आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने दिया है उससे इस धारणा मजबूती मिल रही है कि इस आंदोलन को पीछे से आम आदमी पार्टी का सपोर्ट मिल रहा है……..
नई दिल्ली, 21 जुलाई 2026।
संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन ने राष्ट्रीय राजनीति में नया मोड़ ला दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास की ओर मार्च और धरने को लेकर अब आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का यह कदम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और युवाओं के चल रहे आंदोलन को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है। वहीं दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने भी कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए इसे “जुगलबंदी” करार दिया।
मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 84वें जन्मदिन के अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उनके 10, राजाजी मार्ग स्थित आवास पर पहुंचे। शुरुआत में इसे जन्मदिन की मुलाकात माना गया, लेकिन बाद में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य कांग्रेस नेता अचानक प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ गए और वहां धरने पर बैठ गए। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए देश के युवाओं और CJP कार्यकर्ताओं पर हुए कथित अत्याचार का मुद्दा उठाया।
बताया गया कि कांग्रेस ने इस विरोध प्रदर्शन की पूरी योजना बेहद गोपनीय रखी थी। पहले विजय चौक तक मार्च की योजना थी, लेकिन इसकी जानकारी सार्वजनिक होने के बाद पार्टी ने रणनीति बदल दी। कांग्रेस नेताओं ने जन्मदिन समारोह का बहाना बनाकर एकत्र होने की योजना बनाई और फिर अचानक प्रधानमंत्री आवास की ओर कूच कर दिया। हालांकि पुलिस ने उन्हें हाई-सिक्योरिटी जोन में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया।
धरने के दौरान केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह बातचीत के लिए पहुंचे और राहुल गांधी से धरना समाप्त करने का अनुरोध किया, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने अपनी मांगों पर जोर देते हुए विरोध जारी रखा।
इधर, आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि देश के करोड़ों युवाओं के लिए सोनम वांगचुक और CJP के कार्यकर्ता पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस ने उस आंदोलन का समर्थन करने के बजाय अलग धरना आयोजित कर युवाओं के आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की है। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद भी कांग्रेस ने आंदोलन का साथ नहीं दिया और अब राहुल गांधी युवाओं को जंतर-मंतर छोड़कर अपने धरने में शामिल होने का संदेश दे रहे हैं।
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने भी एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “यह आश्चर्यजनक है कि जंतर-मंतर पर एक महीने से आंदोलन कर रहे CJP और सोनम वांगचुक से सरकार बातचीत नहीं करती, लेकिन राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने के एक घंटे के भीतर ही बातचीत शुरू हो जाती है। आखिर यह कैसी जुगलबंदी है?”
AAP नेताओं के इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस की रणनीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विपक्षी दलों के बीच आंदोलन की दिशा और नेतृत्व को लेकर उठे सवाल अब सियासी चर्चा का विषय बन गए हैं।
हालांकि कांग्रेस ने अपने धरने को युवाओं के समर्थन और केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध का हिस्सा बताया है, जबकि AAP का दावा है कि इस कदम से जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का प्रभाव कम करने की कोशिश की गई।
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