अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक समझौता, MoU पर हुए हस्ताक्षर; चार महीने पुराना संघर्ष समाप्त…….

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अमेरिका-ईरान के बीच ऐतिहासिक समझौता, MoU पर हुए हस्ताक्षर; चार महीने पुराना संघर्ष समाप्त होने की उम्मीद

वाशिंगटन/तेहरान, 18 जून 2026।

दुनिया की निगाहें जिस समझौते पर टिकी थीं, वह आखिरकार साकार हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच जारी टकराव को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

जानकारी के अनुसार, इस समझौते पर प्रारंभिक डिजिटल हस्ताक्षर पहले ही किए जा चुके थे, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसकी हार्ड कॉपी पर भी हस्ताक्षर किए। समझौते की प्रतियां संबंधित देशों और मध्यस्थ देशों को भेज दी गई हैं।

बताया जा रहा है कि यह 14 सूत्रीय समझौता दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष को विराम देने, क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने तथा आगे व्यापक शांति वार्ता का मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। समझौते के तहत 60 दिनों की वार्ता अवधि निर्धारित की गई है, जिसके दौरान दोनों पक्ष स्थायी और व्यापक समझौते की दिशा में बातचीत जारी रखेंगे।

जिनेवा वार्ता अभी भी प्रस्तावित

हालांकि समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, फिर भी स्विट्जरलैंड के जिनेवा में प्रस्तावित वार्ता कार्यक्रम फिलहाल यथावत रखा गया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस बैठक का उद्देश्य नए हस्ताक्षर नहीं बल्कि समझौते के क्रियान्वयन और भविष्य की रूपरेखा पर चर्चा करना होगा। हालांकि बैठक के अंतिम स्वरूप पर निर्णय आने वाले घंटों में लिया जा सकता है।

तेल निर्यात और प्रतिबंधों में राहत पर सहमति

समझौते के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में ईरान के तेल निर्यात और आर्थिक प्रतिबंधों में संभावित राहत शामिल है। ईरान का कहना है कि उसे अपने तेल की बिक्री बिना परिवहन और बीमा संबंधी प्रतिबंधों के करने की अनुमति मिलनी चाहिए तथा तेल बिक्री से प्राप्त होने वाली आय तक उसकी निर्बाध पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही अमेरिका ने ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों तक पहुंच बहाल करने की दिशा में प्रतिबद्धता जताई है।

60 दिनों तक संयम बरतेंगे दोनों देश

समझौते के अनुसार अगले 60 दिनों तक दोनों देश ऐसे किसी भी राजनीतिक, आर्थिक या सैन्य कदम से बचेंगे जिससे आपसी विश्वास और समझौते के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी अवधि में अंतिम समझौते के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा होगी और आवश्यकता पड़ने पर इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है।

वैश्विक बाजारों पर दिखा असर

अमेरिका-ईरान समझौते की खबर का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दिया। तेल कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और निवेशकों ने इसे पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत माना। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता स्थायी शांति में बदलता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ा लाभ मिल सकता है।

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