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गोंडा में ‘पंडित’ बनकर ठगी का खेल, बंद कमरे की पूजा से गायब हुए लाखों के जेवर; मास्टरमाइंड शफीक गिरफ्तार
गोंडा, 20 जून 2026।
आस्था और अंधविश्वास के बीच की पतली रेखा को पार कर लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने वाले एक कथित तांत्रिक-पुजारी का सनसनीखेज मामला गोंडा जिले के मनकापुर क्षेत्र से सामने आया है। मनकापुर कोतवाली पुलिस और एसओजी टीम ने ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर भगवान, पूजा-पाठ और ग्रह दोष निवारण के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाकर ठगी करता था।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान मेरठ निवासी शफीक उर्फ पंडित रामस्वरूप शर्मा उर्फ बड़े पुजारी के रूप में हुई है। उसके कब्जे से 26 लाख 95 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाकर ‘शिव शक्ति ज्योति एवं आध्यात्मिक अनुसंधान संस्थान’ नाम से गतिविधियां संचालित कर रखी थीं और लोगों को विशेष पूजा-अनुष्ठान के नाम पर प्रभावित करता था।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब मनकापुर कोतवाली क्षेत्र के आजाद नगर निवासी सुशील कुमार सोनी ने पुलिस को शिकायत दी। शिकायत के अनुसार आरोपी ने ग्रह दोष दूर करने, पारिवारिक समस्याओं का समाधान कराने और घर में सुख-समृद्धि लाने का दावा करते हुए परिवार का विश्वास जीता। इसके बाद लगभग 75 हजार रुपये की पूजन सामग्री मंगवाई गई और परिवार के सोने-चांदी के आभूषण एक स्टील के डिब्बे में रखवाकर विशेष अनुष्ठान शुरू कराया गया।
परिवार को यह निर्देश दिया गया कि पूजा पूरी होने तक कमरे का ताला नहीं खोला जाएगा और केवल बाहर से दीपक जलाया जाएगा। परिवार ने आरोपी की बातों पर भरोसा कर लिया और कई दिनों तक निर्देशों का पालन करता रहा।
इसी बीच आरोपी ने अपनी मां की तबीयत खराब होने और बाद में निधन होने का बहाना बनाकर आना बंद कर दिया। कुछ समय बाद उसका मोबाइल फोन भी बंद हो गया और परिवार से उसका संपर्क पूरी तरह टूट गया। जब लंबे समय तक कोई जवाब नहीं मिला तो परिजनों को शक हुआ। आखिरकार कमरे का ताला खोला गया तो अंदर का नजारा देखकर सभी दंग रह गए। कमरे से सोने-चांदी के आभूषण और पूजा के नाम पर रखी गई अन्य कीमती वस्तुएं गायब थीं।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो कथित पुजारी की असली पहचान शफीक के रूप में सामने आई। जांच में यह भी पता चला कि यह कोई अकेला मामला नहीं था, बल्कि एक संगठित गिरोह लोगों को निशाना बनाकर आर्थिक लाभ कमाने का काम कर रहा था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गिरोह के अन्य सदस्य नमशेर अली, हसरत अली, इमरान, इंसाद और तोहिद को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। उनके कब्जे से भी बड़ी मात्रा में नकदी तथा सोने-चांदी के आभूषण बरामद हुए थे।
अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी अजीत कुमार रजक ने बताया कि शफीक इस गिरोह का मास्टरमाइंड था और लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस एवं एसओजी की संयुक्त कार्रवाई में उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और अन्य संभावित पीड़ितों तथा गिरोह के नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर लोगों को सावधान करती है कि धार्मिक आस्था के नाम पर किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों पर आंख मूंदकर विश्वास करना कितना भारी पड़ सकता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति के बहकावे में आने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।
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