बेटे को बिजली से तड़पता देख पिता ने बिजली विभाग से मांगी सहायता,विभाग ने कहा पहले वीडियो दिखाओ, बेटे को बचाने के कोशिश में पिता की भी हो गई मृत्यु…….

NGV PRAKASH NEWS

“कुछ मिनट की देरी ने बुझा दिए दो चिराग “: बलिया की दर्दनाक घटना ने इंसानियत, व्यवस्था और बिजली तंत्र पर खड़े किए बड़े सवाल

बलिया 23 जुलाई 2026.

बलिया की इस हृदयविदारक घटना ने पूरे प्रदेश को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक तरफ खेत में टूटा हुआ बिजली का जर्जर तार मौत बनकर पड़ा था, दूसरी तरफ एक पिता अपने जवान बेटे की जान बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा था। लेकिन कुछ ही पलों में वह पिता भी उसी करंट की चपेट में आ गया और देखते ही देखते एक ही परिवार के दो सहारे हमेशा के लिए छिन गए।

बताया जा रहा है कि बांसडीह विधानसभा क्षेत्र के सहपुरवा गांव निवासी 27 वर्षीय राजेश यादव सुबह खेत की ओर गए थे। वहां पहले से टूटा हुआ बिजली का तार जमीन पर पड़ा था, जिसकी चपेट में आते ही वह गंभीर रूप से झुलस गए। बेटे को तड़पता देख पिता जनार्दन यादव बिना अपनी जान की परवाह किए उसे बचाने दौड़ पड़े। इसी दौरान वह भी करंट की चपेट में आ गए।

परिजनों का आरोप है कि घटना के दौरान बिजली विभाग को तुरंत सूचना देकर बिजली आपूर्ति बंद करने की गुहार लगाई गई। उनका कहना है कि समय रहते लाइन काट दी जाती तो शायद कम से कम एक जान बचाई जा सकती थी। वहीं यह भी आरोप लगाया गया कि तत्काल बिजली काटने के बजाय वीडियो भेजने की बात कही गई। इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच की मांग की जा रही है।

जब तक गांव के लोग मौके पर पहुंचे, तब तक पिता और पुत्र दोनों की मौत हो चुकी थी। जिस घर में कुछ समय पहले तक बेटे के भविष्य के सपने सजाए जा रहे थे, वहां अब मातम पसरा है। परिवार में अब केवल बेटियां बची हैं। जिस बेटे के बारे में बताया जा रहा है कि उसने दरोगा (SI) भर्ती परीक्षा पास कर ली थी और आगे की प्रक्रिया का इंतजार कर रहा था, उसकी वर्दी पहनने की उम्मीद भी उसी खेत में दम तोड़ गई।

इस घटना ने केवल एक परिवार नहीं उजाड़ा, बल्कि बिजली व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों को भी उजागर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लंबे समय से जर्जर बिजली के तार मौत का खतरा बने हुए हैं। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन समय पर मरम्मत नहीं हुई। उनका आरोप है कि लापरवाही और खराब रखरखाव के कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं।

घटना के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। सड़क जाम कर प्रदर्शन किया गया और पीड़ित परिवार के लिए न्याय, उचित मुआवजा तथा परिवार की एक बेटी को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई गई। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है।

यह हादसा सिर्फ दो लोगों की मौत की खबर नहीं है, बल्कि एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब पूरा तंत्र देना चाहता है—क्या जर्जर तारों की वजह से और कितने घर उजड़ेंगे? क्या हर शिकायत किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार करेगी? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या किसी आपात स्थिति में इंसानी जिंदगी से बढ़कर कोई औपचारिक प्रक्रिया हो सकती है?

यदि इस मामले में लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही प्रदेशभर में जर्जर बिजली लाइनों का तत्काल सर्वे कर उन्हें बदला जाना चाहिए, ताकि किसी और परिवार को ऐसी असहनीय पीड़ा न झेलनी पड़े।

एक टूटे हुए बिजली के तार ने सिर्फ दो जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि एक मां से उसका जीवनसाथी, बहनों से उनका भाई और पूरे परिवार से उनका भविष्य छीन लिया। ऐसी घटनाएं केवल हादसे नहीं, व्यवस्था के लिए चेतावनी हैं।

NGV PRAKASH NEWS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *